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देखो न जान! आज शादी है तुम्हारी , हमारे जुदाई की घड़ी आई है...

इस मौके पर मेरे दिल ने बड़ी शिद्दत से तुम्हारी यादों की बारात सजाई है।

तुम्हारी यादें उन सूखे हुए तिनकों की तरह हैं...

जो जरा सी हवा चलने पर भी सब कुछ बिखेर देती हैं!

तुम्हारी यादें उस बंद किताब के जैसी हैं...

जो देखने में बस मामूली कागज सी लगती है,

मगर अपने अंदर सब कुछ समेट लेती है!

तुम्हारी कुछ यादें धूप की तरह हैं...

जो जरूरत से ज्यादा मिलने पर,

सब कुछ जला कर राख कर सकती हैं!

तुम्हारी कुछ यादें ठंडी छांव जैसी भी हैं...

जो मन के किसी कोने को हमेशा महकाती रहती हैं!

वो जो हमेशा मेरे दिल में तड़प उठती है तुम्हारे लिए...

उस तड़प के बदले सुकून पहुंचाती रहती हैं !

तुम्हारी यादें नदी की बहती धारा जैसी हैं...

जो निरंतर मेरे मन में बहती रहती हैं!

कभी धीमे तो कभी तेज लहरें सी उठती हैं ..

साथ नहीं हैं हम हमदम हरदम ये कहती रहती हैं!

तुम्हारी यादें जब भी आती हैं,,,

मन बेचैन हो जाता है!

दिल के कोने में सुकून तलाशती रहती हूं...

पर वहां तुम्हारी यादों के सिवा और कुछ नजर न आता है!

जब भी तुम्हें छूना चाहा तो तुम्हारी तस्वीर ही दिखाई देती है..

तुम्हारा चेहरा देखकर ही दिल को सूकूं मिल जाता है! 

गर मिले हम कभी किसी मोड़ पर...

निगाहें न मुझसे फेर लेना!

एक पल को सब कुछ भुलाकर, बस एक बार 

मुस्कुरा कर मेरी तरफ देख लेना!

मैं तो तुम्हारी ही थी , तुम्हारी हूं और तुम्हारी ही रहूंगी...

जुदा हुए हम क्यूं , किसी से न कहूंगी!

कोई उंगली उठाए तुम पर, यह मुझसे न बर्दाश्त  होता है 

सुनो ! मेरे जाने के बाद अपना ख्याल रखना... याद है न,

तुम्हें बुखार होने पर मुझे भी तो बुखार होता है!




:- रचना राठौर ✍️


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