तुम कब आओगे, कर रही हूँ प्रतीक्षा, 
किया है सोलह श्रृंगार, घुंघट भी डाला, 
द्वार पर खडी़ हू कर रही हूँ प्रतिक्षा, 
एक घड़ी एक पल के लिए आओ, 
एक नज़र डाल लो तो सफल  ये श्रृंगार हो जाए, 
         कर रही हूँ प्रतिक्षा ll
वादा किया जन्मो जन्म का पर निभाया नहीं, 
रातें भी मौन है दिन में भी है सनाटा, 
नजरें उठा के देखा तो तारें भी महफ़िल जमा के बैठे हैं , 
        सब कर रहे हैं प्रतिक्षा l
       तुम कब आओगे ll