प्रतीक्षा है उस पल की जब,
मैं मां शब्द किसी के मुख से सुन पाऊंगी।
जब रोएंगी मेरी अखियां खुशी से,
और वह खुशी के आंसू हर किसी को मैं दिखाऊंगी।
नन्हे नन्हे कदमों वाला कोई,
मेरे घर भी खुशी से खिल खिलाएगा।
उसकी प्यारी सी खुशबू से,
मेरे आंगन का हर कोना कोना महक जाएगा।
कब होगा यह इंतजार खत्म,
और मेरा ममता भरा रूप सामने आएगा।
कहीं ऐसा तो नहीं,
कि बस इस मन में ही यह ममता का दीप बुझ जाएगा।
ममता का दीप बुझ जाएगा।

- नीति अनेजा पसरिचा
  रुद्रपुर,उत्तराखंड