भावनाएं
कितनी गहरी,
कितनी अनंत,
ना कोई आदि,
ना कोई अंत,
अनुपम विभोर
भावनाएं,
उमड़ते बादलो की भांति,
कभी गहरी, कभी छटती
कभी बिखरी, कभी सिमटती
कभी प्रशांत सी
कभी उन्माद सी,
कभी आंनद सी
कभी वेदनाओं सी
कभी राग द्वेष सी,
कभी मैत्री अनुराग सी
कभी मृत्यु में जीवन पाती 
कभी जीवन में मृत्यु ढूंढती
क्षण क्षण रूप बदलती
कभी मानव में ईश्वर पा जाती
कभी मानव में अमानवता..
ना कोई अंत ना कोई छोर
असीम अनंत भावनाएं....

निकेता पाहुजा ✍🏻️
रुद्रपुर, उत्तराखंड