जासूसों की जासूसी 
होने लगी जब खामोशी खामोशी

प्यार में होने लगी तब तकुल्लुफ बंदिशे जरा सी 
वक्त भी हो गया बेरहम छोड़ गई वह भी हमें ही गैर सी

फिर हुई अल्फाजों की दगाबाज़ी 
हारकर भी मेरे दिल से हो गई उसकी रुखसते ए नवाजी