पहन लखानी बूट, जापानी सूट, चला होकर मस्ताना।
सिर पे टोपी , बांध गले में टाई ,हुआ है आज दीवाना।।
हो गया इसको रोग लवेरिया, बन गया यह परवाना।।
पहन लखानी बूट ,------------------।।


होगी कोई दीवानी , बनकर कोई लैला इसकी।
निकली होगी वह घर से, छोड़कर शर्म सभी की ।।
हो गया इसको रोग इश्कदा, मुश्किल है समझाना।
पहन लखानी बूट,-------------।।


हो गया पागल यह तो, होश नहीं इसको कुछ भी।
नींद में यह चलता है, नींद में कहता है कुछ भी।।
गाता है बस गीत प्रेम के, घर हो या मयखाना।
पहन लखानी बूट,--------------।।


शुरू हुआ दौर खतों का,लिखे जो लहू बहाकर।
भेजी है उसको सूरत, फूल और लहू से बनाकर।।
चले मिलन को हीर-ओ-रांझा, बन ग़ालिब का फसाना।
पहन लखानी बूट,----------------।।


ओढ़कर झीनी चुनरिया, बालों में गजरा लगाकर।
नैनों में कजरा लगाकर,उड़ी है वह पंख लगाकर।।
दोष नहीं है इसमें इनका , दोषी है बदला जमाना।
पहन लखानी बूट,-------------।।



रचनाकार एवं लेखक- 
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आजाद