बेजुबान जनवार ही हम इंसानों से अच्छे होते हैं, 
बड़े ही वफ़ादार और सच्चे होते हैं, 
इंसान और जानवर मे फर्क सिर्फ बोलने है, 
वरना दर्द तो दोनों को ही होता है, 
जंगलों को काट कर घर बनाया जा रहा है, 
बेघर उन्हें कर के इंसान चैन से सो रहा है, 
कभी कभी जानवरों से ज्यादा ही प्यार होता है, 
जब इंसान जमीं पर और जानवर मखमली चादर पर सोता है
इंसान और जानवर दोनों को हक है जीने का, 
          फर्क बस गुरुर का होता है
जानवरों के पंजों से तो बच भी जाते है, 
पर इंसानों के पंजों से तो कोई भी नहीं बच पाता है, 
जानवर बडे़ ही मासूम और सच्चे होते हैं ll