प्रभु की कृपा बरसे एहि भांति।
सुखी रहे हर जीव एवं प्रजाति।

नूतनवर्ष 2022 रहे सुखदायी।
कष्ट मिले ना ये कोई दुखदायी। 

2019से आई कोरोना बीमारी।
अल्फा डेल्टा ओमिक्रोन सारी।

कैसे जियें रहें सभी इस जग में।
डर लगता भरा हुआ रग रग में।

शिक्षा कैसे हो रही है प्रभावित।
कामधन्धा व्यवसाय प्रभावित।

हरसाल कोई न कोई 1वैरिएंट।
करता संक्रमित है नया वैरिएंट।

कुछ तो करिए प्रभु कृपा ऐसी।
इस वायरस  की हो ऐसी तैसी।

डर से दूर हो सब कमाते खाते।
बीबी बच्चे परिवार खुशी पाते।

स्कूलों में जाएं सब करें पढ़ाई।
खेलें कूदें हर विकास हो भाई।

बिना पढ़े परीक्षा होते हैं पास।
ऐसे संभव नहीं कोई विकास।

शिक्षक शिक्षा और  शिक्षार्थी।
सब से संबंध रखता विद्यार्थी।

भावी भारत का ये नौनिहाल।
देश रत्न हैं भविष्य का भाल।

मानवता इंसानियत ये सीखें।
संवेदना संस्कार भी ये सीखें।

भारतीय संस्कृति व सभ्यता।
इन गुणों से व्यक्तित्व पूर्णता।

इंसानों हेतु मैं कुछ कर पाता।
ये जन्म सुफल मेरा हो जाता।


रचयिता :

डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.