किस्मत का सब खेल है भैया।
किस्मत का होता है सब खेल।

कोई धूप में मेहनत करके भी।
सूखी रोटी खाने में भी है फेल।

मंहगाई का ये आलम है भैया।
चल न पारही गृहस्थी की रेल।

कोई एसी में बैठा बैठे कमाये।
चली आ रही रुपया रेलमपेल।

तिजोरी तहखाने सभी भरे हैं।
नोटों की गड्डियां लेजाए जेल।

किस्मत का सब खेल है भैया।
किस्मत का होता है सब खेल।

किसी की किस्मत में प्रेम नहीं।
धोखा छल कपट के ये हैं खेल।

किसी की जीवन में है बेवफाई।
जिस्मानी प्रेम लालच देती ठेल।

किसी की मुहब्बत परवान चढ़े।
दोनों का प्रेम प्यार में ऐसा मेल।

किसी से मिलता सुख ही सुख।
जीवन साथी देता है प्रेम उड़ेल।

किस्मत का सब  खेल है भैया।
किस्मत का होता है सब खेल।

कुछ होतेहैं ये सूरतों के दीवाने।
मिजाज भी आशिकाना बेमेल।

कुछ दिनों की दोस्ती भी करते।
जल्द ही बिगड़ता है फिर खेल।

कुछ का प्रेम हीर रांझा के जैसे।
बेपनाह मुहब्बत का होता मेल।

कुछ लैला मजनूँ आशिक जैसे।
आशिकी में वह जाए सब झेल।

किस्मत का सब  खेल है भैया।
किस्मत का होता है सब खेल।

कोई रंक कभी राजा बन जाए।
दोनों की किस्मत यह अनमेल।

कोई राजा कभी भिखारी होए।
करनी का सब  जीवन में खेल।

कोई गरीब उठे आसमान तक।
पल भर में बनता  है ऐसा मेल।

कोई बिना कुछ करेही काटता।
जीवन में सजाएं और यह जेल।

किस्मत का सब खेल है भैया।
किस्मत का होता है सब खेल।

किसी का घर आबाद रहे यह।
किसी के  घर कलह का खेल।

किसी तकदीर में छप्पन भोग।
किसी के किस्मत लगी नकेल।

किसी के घर खुशियाँ बरसती।
किसी के घर में दुःखों की बेल।

किसी सब मनचाहा मिलता है।
किसीको मिलता है सब बेमेल।

किस्मत का सब खेल है भैया।
किस्मत का होता है सब खेल।


रचयिता :
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पीबी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.