है मतलब की दुनियाँ ये
मुझे इससे बचाना तुम

मुझे इंसान बनाया है
मेरी इंसानियत बचाना तुम।

जरा पतवार कच्ची थी...
मेरी पतवार कच्ची थी ...
मेरी नैया बचाना तुम ।
मेरी शेरोवाली माँ मुझे रास्ता दिखाना तुम।

है व्यापार की ये दुनियाँ
रखूँ महफूज़ खुद को  कैसे?
वो कवच बतलाना तुम?
मेरी शेरोवाली मां मुझे रस्ता दिखाना तुम। 

मेरी माँ तो सच्ची है;
मेरी राह तकती है।
मुझे काबिल बनाया है।
हौसला दिलाना तुम
मेरी शेरोवाली मां मुझे रस्ता दिखाना तुम। 

कहीं भटक जाऊं मैं 
चल चल कर,
मेरी छांव बनना तुम।
मुझे रस्ता दिखाना तुम।
मेरी शेरोवाली मां मुझे रस्ता दिखाना तुम। 

नहीं भूलूं कभी मंज़िल 
भटक कर स्वार्थ की गलियों में,
रखूँ हौसला खुद पे
वो शक्ति दिलाना तुम।
मेरी शेरोवाली माँ...
मुझे इंसान बनाया है....
मेरी इंसानियत बचाना तुम।
जरा पतवार कच्ची थी...
मेरी पतवार कच्ची थी...
मेरी नैया बचाना तुम।
मेरी शेरोवाली मां मेरी नैया बचाना तुम। 

मेरी माँ तू सच्ची है ;
बस हौसला दिलाना तुम।
मेरी शेरोवाली मां मुझे रस्ता दिखाना तुम। 
मुझे रास्ता दिखाना तुम। 
मुझे इंसान बनाया है,
मेरी इंसानियत बचाना तुम,
मेरी शेरोवाली मां मुझे रस्ता दिखाना तुम। 
     डाॅ पल्लवीकुमारी"पाम 
     अनिसाबाद, पटना,बिहार