ये वही दिल्ली है ।
जिसकी कीर्ति विश्व में गायी जाती है ।
ये वही दिल्ली है ।
जहाँ अमर ज्योति कहानी पढाई जाती है ।
ये वही दिल्ली है।
जहाँ सियासत चमकाये जाते है ।
ये वही दिल्ली है ।
जहाँ गरीब धमकाये जाते हैं ।
ये वही दिल्ली है।
जहाँ देश विरोधी नारे लगते है।
ये वही दिल्ली है ।
जहाँ केवल अमीर ही प्यारे लगते है ।
ये वही दिल्ली है ।
जो वंशवाद में मिलती है ।
ये वही दिल्ली है ।
जो परिवार वारवाद में मिलती है ।
ये वही दिल्ली है ।
जो जाति पाति में मिलती है ।
ये वही दिल्ली है ।
जहाँ धर्म से बाटे जाते हैं ।
ये वही दिल्ली है ।
जहाँ मानव पशु समान काटे जाते है ।
ये वही दिल्ली है।
जहाँ की प्राचीरो से ।
अब मन बहलाया जाता है।
ये वही दिल्ली है ।
जहाँ झूठ को भी सत्य बनाया जाता है।
ये वही दिल्ली है ।
जहाँ शकुनी के पाशे चलते थे ।
ये वही दिल्ली है ।
जहाँ भाई से भाई लङते थे।
ये वही दिल्ली है ।
जिसने मुगलो के अत्याचार सहे।
ये वही दिल्ली है ।
जिसमें अंग्रजों के हाहाकार सहे ।
ये वही दिल्ली है ।
जहाँ बेटियों पर अत्याचार होते है।
ये वही दिल्ली है ।
जहाँ संविधान भी लाचार होते है।।
ये वही दिल्ली है।
जहा जय जवान जय किसान के नारे लगते थे।
ये वही दिल्ली है ।
जहाँ कभी किसान भी प्यारे लगते थे ।
ये वही दिल्ली है ।
जहाँ सत्य अहिंसा की बातें गायी जाती थी।
ये वही दिल्ली है ।
जो दूजी न दुनिया सारी है
कुछ भी हो ।
ये वही दिल्ली है ।
जो हमें जान से ज्यादा प्यारी है ।
सर्वेन्द्र मिश्र " विरक्त"


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