तपती धुप हैं यह जीवन
प्यासी धरती सा मेरा मन
अंबर की छाव हो जैसे
ममता का यह आंचल
कोई शिकायत नही
कोई गिला नही जिंदगीसे
साथ न रहे ना सही माँ
ले आचल मे छुपाके के
गर्दिश मै लगे यह राहे जिंदगी की..
एक पल पलके मुंद लुं मै
तेरे हसी तस्वीर देख लुं मै
तेरे कदमों को छू लुं मन मै
कर लू जिनेका अटल प्रयास फिरसे
एहसास मे जिन्दा है अभी सास बनकर
माँ तेरे आंचल की छाव मिले तो
सह लुं कायनात के सारे जख्म इस दिल पर
छूपा ले मुझे तेरी आंचल मै ,
के गर्दिश मै लगे यह तारे आसमाँ के..
पहचान हूँ तेरी छाव सी मै
साया भी कभी ना साथ छोडे
फिर यह दर्द सिर्फ क्यो मुझे लगे
हर लडकी ही क्योँ मायका छोडे..
ले माँ मुझे छुपाके आंचल मै तेरी के
गर्दिश मै लगे मुझे आज दुनिया यह सारी..
सारिका ऐवले..

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