जागता हूँ मैं जब ,
रातों को कभी, 
सो जाओ कह कर, 
सुलाती है मुझे  ,
जब सो जाता हूँ मैं, 
तो सपनों में आ कर ,
जगाती है वो मुझे, 
जब  जगाना ही था, 
तो सुलाय था क्यूँ, 
यह कौन सी अदा है, 
कोई बता दो मुझे ,
क्या हुई है खता ,
ये बता दे मुझे, 
क्या मुहब्बत इसी, 
का नाम है, 
कभी कभी ऐसा, 
लगता है मुझे की, 
मुहब्बत इसी का नाम है |

     पुष्पेन्द दुबे