कई बार सोचती हूँ 
तुम पर कुछ ही पंक्तियाॉं लिखूँ
लेकिन ये कलम तुमसे 
मुझसे भी ज्यादा इश्क कर बैठी
और मेरी हर कविता में 
तुम्हारा जिक्र कर गई

लोग तुम्हें दुनिया में ढूँढते हैं 
मेरी कविता के ज़रिये 
तुम तक पहुँचने की
लाख कोशिशें करते हैं

लेकिन ये राज तो 
बस हम दोनों ही जानते हैं
यानि मैं और मेरी कलम
कि अभी तो तुम 
मुझमें ही समाए हो

तुम मेरी कल्पनाओं का सरताज हो
झर झर बहते मेरे अल्फ़ाज़ों का
सार हों
मेरी कविताओं का महत्वपूर्ण 
किरदार हो

सच कहूँ तो
तुम मेरी भावनाओं को 
ब्यां करने का एक प्यारा-सा 
माध्यम हो
एक एहसास हो
अकेलेपन का साथ हो

दिल को सुकून देने का
मेरी कलम और अल्फ़ाज़ों का 
एक खूबसूरत सहारा हो
एक खूबसूरत सहारा हो।।

-आरती वत्स✍🏻