दिल्ली की गलियों मे भटकते हुए..
एक लड़की एक सुप्रसिद्ध IAS संस्था मे प्रवेश लेती है
लेकिन...उसे वहाँ से जलील करके उसके मैनेजर उस लड़की की हालत देखकर ये कह के निकाल देते है कि तुम्हारी हैसियत नही यहाँ है।
मैनेजर की ना को स्वीकार करके रोते हुए निराशाजनक मन से वो वहाँ से चली जाती है।
भले ही उसकी पृष्ठभूमि और आर्थिक अच्छी नही थी। लेकिन उसके इरादे अपने देश के लिए और समाज को नई दिशा की ओर ले जाने के लिए बहुत मजबूत थे।
समाज सेवा की जूनून उसके अंदर इस कदर थी कि ....
खुद आर्थिक तंगी और जिंदगी में नकारात्मकता झेलते हुए वो एक संस्था से जुड़ी थी जिसका मकसद गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान करना है।
एक दिन वो बच्चों को अब्दुल कलाम की जीवनी पढा रही थी....तभी एक बच्चे ने उससे प्रश्न किया - कि कलाम जी की हालत ठीक नही थी और यहा तक उनके पास पढ़ने-लिखने को किताबें भी नही थी फिर भी वो इतने बड़े इंसान और देश के राष्ट्रपति कैसे बने ?
बच्चे का प्रश्न सुनके उस लड़की ने बहुत समझदारी और गंभीरता से उत्तर दिया कि सबकुछ सिर्फ पैसा होना ही नही होता...अगर हमारे अंदर दृढ़ इच्छा-शक्ति और मेहनत की लगन हो तो हम दुनियां की सारी खुशियाँ हासिल कर सकते है ।
कक्षा समाप्त होती है सभी लोग अपने-अपने घर को जाते है। वो लड़की भी जाती है तभी अचानक उसे...उस बच्चे द्वारा पूछे प्रश्न और अपने द्वारा दिए उत्तर याद आते है।
गंभीरतापूर्वक सोचने के बाद उसे उसके सारी परेशानियों का हल मिल जाता है। ये बात उसकी जिंदगी की टर्निंग प्वाइंट साबित होती है। और उसे सबकुछ समझ आ जाती है।
अब उसका लक्ष्य साफ हो जाता है और उसे किसी बात की कोई परेशानी नही होती है....वो लड़की अब पूरी मेहनत और लगन से UPSC की तैयारी अपने से करती है। और उसकी परीक्षा देती है जिसमे वो टाॅप करती है सर्वोच्च रैंक हासिल करती है।
इस लड़की के जीवन के कहानी से हम यह सिख ले सकते है कि परेशानियाँ जिंदगी का ही हिस्सा है जिससे हमे खुद की काबिलियत का पता चलता है। और आज हम जिस भी परेशानियों में उलझे हुए है या उसका हल नहीं मिल रहा तो स्वयं से प्रश्न करिये उसका उत्तर और आपके जीवन के समस्त मुश्किलों का हल स्वयं आपके पास होगा । तो आप खुद से प्रश्न किजिए क्योंकि जिंदगी में हमे हमारे मुश्किलों से खुदको सिर्फ हम ही निकाल सकते है ।
दिव्यांशी निषाद
प्रयागराज ,उत्तर-प्रदेश

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