उन बुजुर्गों की कहानी सुनो,
जो अपने दुख के बयां कर के आंखों से आंसू बहाते हैं।
जब नौकरी में थे इज्जत थी बहुत ।
रिटायरमेंट के बाद डूबता हुआ सूरज,
फ्यूज बल्ब कह कर, सभी बुलाते हैं ।
जिस नजरों में इज्जत थी बहुत
आज तिरस्कार की नजर से देखते हैं सभी।
उगते हुए सूरज को सब प्रणाम करते हैं
डूबते हुए सूरज को नहीं।
अपने बड़प्पन के बयान कैसे करूं,
जब समय था ऑफिस में हुक्म देता था मैं,
आज घर पर भी हुक्म चलती नहीं।
हाय बुढ़ापे के इस उम्र में दुखों का बयान कैसे करूं।
हाय बुड्ढा हूं मैं यह कह कर घर में भी
सभी दया तिरस्कार दिखाते हैं
घर बाहर बात बात में
बुढ़ा होने का सभी एहसास जताते हैं ।
जिन बच्चों की परवरिश में अनुशासन सिखलाया था ,
मैं आज उनके अनुशासन में जी रहा हूं मैं अभी। बहू के ताने से दुखी हूं मैं ,
अपने बच्चों के व्यवहार से दुखी हूं मैं।
जिन बच्चों को उंगली पकड़कर चलाना सिखाया,
जो बच्चे दिल के टुकड़े थे मेरे आज मुझ को घर से बेघर कर दिया।
इस उम्र में हजारों बीमारियों ने घेरा,
जब सहारे की जरूरत है हमें इस उम्र में बच्चों ने ठुकराया हमें।
हाय बुढ़ापा की उम्र दुखी की बयां क्या करूं,
मुंह से बोलते हाथों से लिखते कांपते शब्दों का बयान क्या करूं,
भगवान ने भी बुड्ढे लोगों पर अत्याचार कर दिया,
करोना ने भी कमाल कर दिया।
करो ना बुजुर्गों पर यमदूत की तरह आया
बुजुर्गों पर ( करोना )दुखों का पहाड़ टूट गया। हाय बुढ़ापे के दुखों का बयान क्या करूं अगर कुछ शब्द गलत लिखे हैं तो नजरों को दोष का इस उम्र के पड़ाव पर माफ कर देना।
हाय बुढ़ापे के दुखों का बयान क्या करूं।
सपना कुमारी
बिहार पटना

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