उफ ये महामारी कितनो के घर कितनो के आँगन सूने करेगी रमा के हाथ तेजी से काम कर रहे थे मन में बवन्डर मचा था तभी एक मरीज पर नजर पडी वो बुजुर्ग कुछ दूरी पर पडे बेड को घूरे जा रहे थे उनकी आँखों मे आसू छलछला आये थे क्या हुआ दादा आप चिन्ता मत करो अच्छे हो जाओगे बेटा मुझे मेरी फिकर नही है ""फिर ""रमा ने फिकी मुस्कान के साथ पूछा। वो पास मे मेरा पोता है बस वो अच्छा हो जाए कुल का अकेला चिराग है उसकी माँ उसके बगैर जी न पायेगी अभी कुछ दिन पहले ही नक्सलियो के हाथो अपना सुहाग खोया है वही उसका अखिरी सहारा है कुछ नहीं होगा आप निश्चित रहो वो अपना मास्क ठीक करते हुए बच्चे की तरफ बढ गई उसने बच्चे को चेक करने के लिए चद्दर खीची '''मेम नौ ""वार्डब्वाय पीछे से बोला अब वो जिवित नहीं है उसके हाथ काँप गये उसने पलट कर उस बुजुर्ग की ओर देखा और वो उनसे नजर न मिला सकी बुजुर्ग आशा भरी नजरो से उसे देखे जा रहा था वो आगे बढ गई दो चार पेशेन्ट चेक कर अपने केबिन में आ गई और आते ही वाशरूम में घुस गई उसने कपड़े चेन्ज किये घर के लिए निकल गई आते समय उसने बैड पर नजर डाली बैड खाली था बच्चे की बाडी हटा दी गई थी उस बुजुर्ग की तरफ देखने की हिम्मत न हुई वो नजर बचाकर बाहर आ गई रास्ते भर सोचती रही पापा को कल ही गाँव भेज देगी गाँव में पापा सुरक्षित रहेगे घर पहुंच कर पापा की तैयारी मै लग गई पापा जाने के लिए तैयार न थे वो अकेला दिल्ली में कैसे छोड़ सकते बेटा तू तो डाक्टर हैं फिर भी तू डर रही है वो पापा को समझाये जा रही थी पापा महामारी ये नहीं देखेगी आप डाक्टर के पापा हो "पापा के सुरक्षा का सारा सामान रख कर गाँव भेज दिया उनके जाने के बाद उसने राहत की सास ली वो सोफे पर आकर आखे बन्द कर बैठ गई। वो कितनी खुश थी मेडिकल लिस्ट में उसका नाम सबसे ऊपर था पापा खुशी से झूम रहे थे सब दोस्तों को गर्व से बता रहे थे की मेरी बेटी रमा मेरा बेटा है गाँव में फोन पर बताया पूरे गांव ने जश्न मनाया गांव की पहली लडकी थी जो डाक्टर बनी थी वो भी दिल्ली में उसके चेहरे पर मुस्कान खीच गई लाँकडाऊन की वजह से बाजार बन्द उसको भूख लगी थी उसने फ्रिज खोला खाने के लिए कुछ भी न था उसने दलिया गैस पर चढा थी रात काफी हो गई थी अचानक फोन की घन्टी बजी कुछ आपातकाल केस आ गये थे वो फटाफट हास्पिटल के लिए निकल गई सुबह से लेकर रात तक फुर्सत नही मिलती सारे कर्मचारी तन मन से मानव सेवा में लगे थे रमा ने एक टीम बना ली थी अब कुछ पेसेन्ट अच्छे भी हो रहे थे अचानक सफाईकर्मी सविता बाई महामारी की चपेट में आ तीन दिन मे ही उनका स्वर्गवास हो गया रमा का मन जबाब देने लगता पर देश सेवा का जज्बा उसे पीछे न हटने देता कुछ दिनों के लिये उसे रिचर्स सेन्टर बुलाया गया था उसकी कार्य कुशलता से हर जगह सराहना होने लगी अचानक एक रात रमा के शरीर का तापमान बढ़ने लगा उसने काँल किया डाक्टर की टीम उसे ले रमा भी महामारी की चपेट में आ गई पर उसने हिम्मत न हारी उसके जज्बे से करोना ने हार मान ली
दो महीने मे वह फिर से अपनी समुह के साथ तैयार थी ज़िन्दगी की जगं लडने के लिए वो हिन्दुस्तान की बेटी है वो कभी हार नहीं मान सकती उस जैसे लाखो बेटे बेटियाँ है जो हरपल देश के लिए अपना फर्ज निभाने के लिए तत्पर है उन्हें दिल से धन्यवाद ।
जयहिन्द जय भारत
रीमा ठाकुर

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