जीवन में हमनें एकता का
बेहद अज़ीब का मंज़र देखा...!
नेता के देहांत में नेताओं को और अभिनेता
के देहांत में अभिनेताओं को ही देखा..!!
शान से बैठा आसमान पर उस चंद्रमा को
भी हमनें रात में चमकते जमीन पर देखा...!
जो कल तक उड़ रही थी हवाओं के साथ
आज उस माटी को धरती में जमते देखा..!!
सच्चाई से भी अब दुश्मनी सी होने लगी है
जब से झूठे लोगों को रिहा होते देखा...!
जिन्दगी कि इस कशमकश में अपनों के लिए
हमनें एक विजेता को भी हारते देखा..!!
संसार को खातीं जा रही है इंसानों
के द्वारा बनी बीमारी को देखा...!
गिरगिट ने भी रंग बदलना छोड़ दिया
जब उसनें इंसानों को रंग बदलते देखा..!!
हैरान सी रह गई है मंजिलें सारी जिन्दगी
ने भी सफर को बहुत बार आज़मा के देखा...!
थामी सी रह गई बारिश की सभी बूंदें
जब आसमां ने हमारे सनम को भीगते देखा..!!
आरती सुधाकर सिरसाट बौद्ध
बुरहानपुर मध्यप्रदेश

1 टिप्पणियाँ