एक आत्मविश्वास से भरी नारी से .
.क्योंकि उसे पसंद नहीं होती .
जी हुजूरी या हाँ में हाँ मिलाना ।।
उसे आता नहीं झूठ की डोर से रिश्ते बाँधना स्वांग की चाशनी में डुबोकर अपनी बातें मनवाना ना वो करती है नई नई फ़रमाइशें
वो तो संवारती है स्वयं को आत्मविश्वास से .
निखारती है अपना व्यक्तित्व मासूमियत से
अपने कर्म से ,
अपनी निस्वार्थ भावनाओं से
सच पर रहती है अडिग
वो झुकती है तो केवल निस्वार्थ प्रेम से
पौरुष का ढोंग करने वालों के आगे
नत मस्तक कभी होती नहीं
वह जानती है अच्छी तरह से
घर संभालना भी, जिम्मेदारी निभाना
साथ ही अपने स्वाभिमान की रक्षा भी
झुकती नहीं वो गलत , अनर्गल बातों से
अगर मन सच्चा हो, दिल मे हौसला हो
तभी प्रेम करना ऐसी स्त्री से
वरना पिघल जाओगे उसके .
स्वाभिमान की आँच से .
इसीलिए कहा है .
आसान नहीं है प्रेम करना
एक आत्मविश्वास से भरी नारी से
बहुत कठिन है ये डगर पनघट की ।।
शोभना गोयल

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