आज सुबह से ही घर में उत्सव का माहौल था। करोना की वजह से किसी को बुलाया नहीं गया था। नये घर की ओपनिंग थी। न न करते फिर भी चालीस पैतलिस लोग हो गये थे। 
हमारी भांजी खुशी बहूत प्यारी सी बच्ची हमारे पास बीस दिन  से रहने आ गई थी। सारे बच्चे इकटठे सब के अन्दर उत्सुकता 
पण्डित जी आ चुके "हवन शुरू होने मे कुछ देर थी। हमने पण्डित जी से शरद पूर्णिमा के बारे मे महज जानकारी के लिए पूछ लिया 'सारे बच्चे हमारे पास आकर बैठ गये। 
उनकी उत्सुकता देखते हुए हमने पण्डित जी का हौसला बढाया भावावेश मे पन्डित जी हमारे"

पुरोहित भी है हमारे पूछे गये अनगिनित सवालो मे फस गये। हालकि की उनका हमारे उपर असीम अशीर्वाद है। 
आज पन्डित जी ने अपना उद्देश्य बना लिया था कि पूजा के बीच मे ही हमे शरदपूर्णिमा के महत्व को समझाऐगे। 
हवन प्रारम्भ हो चुकी थी। मन्त्रोच्चार हो रहे थे। और बीच बीच मे शरदपूर्णिमा की प्रभु की लीलाओ का गुणगान भी हो रहा था। पण्डित जी गुणगान कर रहे थे। हम सब भावविभोर हो सुन रहे थे। 
पन्डित जी बोले """"आज के दिन ही माँ लक्ष्मी समुद्र मन्थन से उत्पन्न हुई थी आज ही उनका जन्मदिवस है। वो नारायण प्रभु की प्रिया है। इसलिए आज के दिन जो लक्ष्मीपूजन करता है। उसपर उनकी असीम कृपा रहती हैं। वैसे हमारे यजमान पर भी असीम कृपा है उनकी "हमे हँसी आ गई "
पन्डित जी कुछ झेप से गये। 
चार घन्टे की पूजा के बाद पन्डित जी फ्री हुए "और हमे बहुत कुछ जानना धा। 
हमारे अनुरोध पर उन्होने हमे सारी प्रभु लीलाओ से अवगत कराया। 
आज शरदपूर्णिमा मतलब अमृतवर्षा योग जिसे बहुत सारे नामो से पुकारा जाता है। उनमे से एक नाम कोजगरी पूनम भी है। आज के दिन ही कृष्ण ने राधा और सभी गोपियो सँग रास रचाया था। महारास की वो अलौकिक घटना मे स्वयं शिव जी भी उपस्थिति थे। वो महारास देवताओ को भी दुर्लभ  है। उस महारास से राधा कृष्ण प्रेम अन्नत हो गया। 
चाँद की शीतल किरणे जब प्रकृति पर पडती है तो प्रकृति आच्छादित हो जाती है। 
और सारा संसार अमृत मय हो जाता है। और जब चाँद की किरणें हमारे शरीर से
है तो जो पवित्र ऊर्जा हमारे सारे रोगो को नष्ट करती हैं। इसलिए हम निरोग होते है। 
चाँद आज अपनी किरणो से चारो ओर रश्मिँया बिखेर रहा था। सब ओर ओजस फैला था। और हम तीनो उस अमृत का पान कर कर रहे। आज चाँद को निहारते हुए कितनी अलौकिक कहनिँया आँखों के समक्ष घट रही थी मेरी भानजी खुशी खीर की रखवाली कर रही थी और बेटा भी "उनकी अतुरता देखते बन रही थी। बाल सुलभ मन पायस को अमृत होते देखना चाहता था। आप सब भी आन्नद लिजिए और अमृत पान किजिए और चाँद को निहारते हुऐ शीतलता बनाऐ रखिऐ।।।    



                रीमा ठाकुर