आजादी के मायने
कहां पहचान पाता
खोजकर जान पाता
है मानव मन क्यू कि
उसे आदत है जकड़े
रहने और बेड़ियों में
बंधे रहने की ताकि
जब लिखा जाए
इतिहास और रचा
जाए कोई नवीन ग्रन्थ
तो बता सके वो अपनी
मजबूरियां जिसकी आड़
में उसने कर्महीन होकर
जाना ही नहीं कि कर्मठता
से मिली आजादी में मिलता
कितना सुख और सुकून जीवन
का , वह तो आदिकाल से ही है
था,और रहेगा, आदिमानव
मंजुबाला

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