बात उन दिनो की है जब कॉलेज की पढ़ाई के लिए हम पहली बार घर से अकेले हॉस्टल गए मेरे साथ में मेरी स्कूल की सहेली रेखा भी थी उसके मामा जी हमें स्टेशन पर लेने आने वाले थे इस वजह से पापा को साथ आने के लिए हम दोनों ने ही मना कर दिया था जब मामा जी का घर है तो चिंता की कोई बात ही नहीं थी इसलिए रेखा के मां पापा बेफिक्र से थे ।
रेखा ने मेरे पापा की मामाजी से फोन पर बात करवाई तब वो भी मान गए।
हॉस्टल लाइफ के बारे में हम लोगों ने खूब सुन रखा था अब तो ये इंतज़ार था कि जल्दी से जल्दी हॉस्टल पहुँचे!
जैसे ही train station पर पहुंची कोच के बाहर खड़े रेखा के मामाजी ने हैं लोग का सामान उठाने के लिए कुली को बुला लिया था।
आने वाले भविष्य के लिए नई उम्मीद नए सपनो की दुनिया आँखों में चमक रही थी!
रेखा के मामा जी हम दोनों को कॉलेज के हॉस्टल तक छोड़ कर चले गए!
रूम नंबर 13 मैं सुनैना , रेखा, संजना, और दीप्ति हम चार इस रूम में थे!
रूम दिखने में काफी अच्छा और खुला_खुला बड़ा सा था!
रूम में ही खिड़की थी जो रोड साइड खुलती थी!
टॉयलेट भी साफ_सुथरा था!
हम दोनों ने खुश होकर एक दूसरे को देखा और अपना समान अपनी कबर्ड में जमाया।
सफर की थकान भी थी आज का खाना तो घर से मां ने पैक कर दिया था
रेखा और हम दोनों ने खाना निकाल कर खाया और अपने अपने बेड पर पैर पसार कर लेट गए!
हम दोनों बड़ा अच्छा सा फील कर रहे थे अपने कैरियर को लेकर ट्रेन में भी हम दोनों ने देर तक बातें की थी अपनी पढ़ाई का सारा शेड्यूल हम लोग प्लान कर चुके थे।
बस एक बार classes शुरू हो जाएं तो हम लोग बाकी का अपना रूटीन college time के हिसाब से सेट कर लेंगे हम दोनों ने यही सोचा था
दूसरे दिन से हमारी क्लासेस थीं 9 बजे से 5बजे तक!
हमारी रूम पार्टनर से भी हमारी बातचीत हो चुकी थी वह लोग भी व्यवहार में बहुत अच्छी थीं।
रात हम चारों ही जल्दी सो गए थे।
मेरी सुबह जल्दी उठने की आदत थी सुबह उठ कर फ्रेश हो कर नहा कर थोड़ी देर ध्यान किया और मोबाइल के मेसेज देखने लगी अमित के मेसेज थे!
मैं मेसेज पढ़ने लगी.. "सुनैना! कितनी बार तुम्हें कॉल किया मैंने!
तुम्हारा नंबर ही नहीं लग रहा था!
तुम्हारी सहेली को भी किया उसका भी कॉल नहीं लगा!
तुम्हारे एडमिशन का क्या हुआ ?
तुम मेरे ही कॉलेज में एडमिशन ले रही थीं अभी तक तुम्हारी कोई ख़बर नहीं है..!
कल से क्लासेज शुरू हो रही है!
"Hii अमित, सॉरी यार! नयी सिम ले के दी है पापा ने उन्हें लग रहा था कि पुरानी सिम रहने से मैं दोस्तो से बातें करते रहूँगी नयी सिम डालने से पुराने सारे कांटेक्ट खत्म हो जाएंगे!"
रेखा के पापा ने भी उसकी पुरानी सिम बंद कर नयी सिम दिला दी और पेकिंग के चक्कर में तुम्हें कॉल नहीं कर पायी और मैंने सोचा कॉल करने की जगह मिल ही लूँगी तुमसे!
"अमित,कितना मिस किया है तुम्हें यार।"
क्या कर रही हो ?
"सुनैना : तुमसे बात!"
"अमित,सुनो,नीचे आ जाओ!
कैंटीन में चल कर नाश्ता करते हैं मेस में अभी देर लगेगी!
"सुनैना, अच्छा, आती हूँ!"
सुनैना को देखकर अमित का चेहरा खुशी से खिल गया ।
अमित : कैसी हो जिंदगी.?
सुनैना : तुम यहाँ भी शुरू हो गए ..
अमित : यहाँ और वहाँ क्या होता है..? तुम मेरी जिंदगी हो तो हो!
इस बात पर अब कोई बहस नहीं होगी।
सुनैना ::अच्छा ठीक है ।कोई बहस नहीं अब से।
अमित सुनैना को स्कूल के दिनों से ही पसंद करता था!
अमित जब 10 th क्लास में था जब सुनैना ने उसके स्कूल में दाखिला लिया था!
एक बार की बात है, इंटरवेल के समय सारे बच्चे लंच कर रहे थे उसने देखा ग्राउंड में पेड़ के नीचे सबसे दूर एक लड़की अकेली बैठी है साइड में लंच बॉक्स रखा है, और लिख रही है..!
अमित :उसके पास जाता है.. सुनो!
सुनैना :गर्दन उठाए बिना.. सुनाओ.?
अमित : चेहरा ऊपर करोगी तो सुनाऊँ.?
सुनैना : नीचे झुककर लिखते हुए ही कान से सुनते हैं ।चेहरे से कौन सुनता है ?
अमित : लंच के समय सब लंच कर रहे हैं और तुम लंच छोड़कर लिख रही हो..?
सुनैना : तुमने वो कहावत सुनी होगी.. काल करे सो आज कर, आज करे सो अब..?
अमित : हाँ! सुनी है! तो..?
सुनैना : मैं उस कहावत को ही अमल में लाने की कोशिश कर रही हूँ! क्लास में जो भी अब तक पढ़ाया उसके नोट्स बना रही हूँ!
घर जाकर भूल गयी तो..
अमित : तो क्या..?
सुनैना : तो ये.. ऊपर चेहरा करती है कॉपी बंद करते हुए बेग में रखती है और लंच खोलती है..
अमित : उसकी और देखता रह जाता है बड़ी बड़ी शरारत भरी बोलती हुई आँखें.. अमित को ऐसे देखते हुए..
सुनैना : गर्दन को साइड में झुका कर पलकें झपकाती है
और आँखों से ही इशारे से पूछती है कि क्या हुआ.?
अमित : पहले तो उसकी इस शरारत पर झेंपता है पर खुद को कंट्रोल कर हँस पड़ता है!
मैं अमित :10 th a मैं पढ़ता हूँ!
सुनैना : उसकी नकल करती है.. मैं सुनैना 9th a मैं पढ़ती हूँ!
कुछ दिन पहले ही यहाँ एडमिशन लिया है!
दोनों हँसने लगते हैं!
लंच करोगे सुनैना ने पूछा..?
मैं तो लंच लाया नहीं हूँ घर पर ही छूट गया जल्दी में
कोई ना.. मेरे साथ खालो.. मम्मी ने एक्सट्रा रख दिया है पनीर परांठा और नींबू का अचार..
एक परांठा रोल कर के देती है लो.. अचार खाना हो तो ले सकते हो!
यहीं से हमारी दोस्ती शुरू हुई!
अमित को बिल्कुल पसंद नहीं था कि कोई भी लड़का मुझे देखे..
कभी_कभी तो रास्ते में किसी लड़के को फब्तियां कसते या जान बूझकर टकरा कर निकलते देख लेता तो उन्हें पकड़कर मारता था कई बार मैंने उससे कहा कि ये मत करो पर बेहद जिद्दी जो करना होता था वो ही करता!
पढ़ने के साथ ही स्पोर्ट्स में भी आगे रहता स्कूल की क्रिकेट टीम को वो हमेशा जिता कर लाता था।
आवाज़ बहुत अच्छी थी! कितनी ही बार फ्री पीरियड या लंच टाइम में मैं उससे गाना सुनाने को कहती!
हम दोनों की दोस्ती कब प्यार में बदल गई पता नहीं चला.. स्कूल में हम दोनों रोज मिलते ही थे तो कभी इस बात का एहसास नहीं हुआ!
जब अमित का 12th का रिजल्ट आया और उसने स्कूल में टॉप किया!
उसे उसकी पसंद का कॉलेज भी मिल गया था!
मैंने उसे बहुत प्यारा कार्ड बनाकर दिया!
अमित : जाने से पहले तुमसे मिलना है मुझे !
सुनैना : कहाँ पर ?
अमित : कॉफी हाउस!तुम अपने घर पर भी बोलकर आ सकती हो कि मैंने अपने पास होने की ट्रीट दी है।
और अब सभी दोस्त अलग_अलग चले जाएंगे।
दूसरे दिन कॉफी हाउस में अमित और सुनैना एक दूसरे को देख कर खुश हो जाते हैं।
दोनों सबसे लास्ट वाली टेबल पर जाकर बैठते हैं ।
अमित सुनैना का हाथ पकड़कर बोला कल मेरी ट्रेन है। मैं तुम्हें बहुत मिस करूँगा!
दो साल तुम्हारे साथ पता नहीं चल पाया कैसे निकले अब एक साल तुम्हारे बिना कैसे निकलेगा पता नहीं है मुझे!
एक साल.. क्या मतलब है तुम्हारा?
नेक्स्ट इयर तुम भी मेरे पास आ जाओगी..
मेरे कॉलेज में ही ऐडमिशन लोगी तुम!
सुनैना : टॉपरस को ही एडमिशन मिलता है वहाँ
अमित : तुम भी अब तक स्कूल की टॉपर रही हो और इस साल भी तुम ही टॉप करोगी ये मैं जानता हूँ!
सुनैना : अमित इतना भरोसा ?
अमित : हाँ, मुझे खुद से ज्यादा तुम पे भरोसा है और तुम मेरे भरोसे को कभी टूटने नहीं दोगी!
सुनैना : ठीक है.. नहीं टूटने दूँगी! प्रॉमिस!
अमित : उसके हाथ पर किस करता है और उसे भी बोलता है कि वो भी उसे हाथ पर किस दे!
सुनैना : अमित मुझसे नहीं होगा!
अमित : प्लीज.. कल चला जाऊंगा कोई तंग नहीं करेगा तब तुम्हें!
रोज रात को हम बात करेंगे दिन भर जो भी हम करेंगे उस पर.. तुम्हारी कहावत को चरितार्थ करने की पूरी कोशिश करूँगा "काल करे सो आज कर!"
मेरा हाथ पकड़ो लो पकड़ लिया अपने पास लाओ.. ह्म्म!
अब आँख बंद करो.. कर ली.. अब अपने होंठ के पास मेरे हाथ को ले जाओ.. ठीक है.. किस करो मुझे।
सुनैना::बहुत खराब हो तुम अमित कैसे भी करके तुम हर बार अपनी बात पूरी करवा लेते हो!
सुनैना के गाल शर्म से हो गए थे।
अमित ने पहली बार उसे शर्माते हुए देखा था उसकी शरारती आंखों में लाल डोरे देख अमित बोला उफ्फ,कितनी नशीली आँखे लग रही हैं तुम्हारी!
अमित सुनैना ने उसके मुंह पर हाथ रख दिया।
अमित ने उसका हाथ पकड़ कर उसकी हथेली को चूम लिया और बोला सच बोल रहा हूं।
हां,पर मुझे ऐसे शर्म आती है सुनैना बोली ।
अमित::ये बात है ?
सुनैना:: हम्म। यही बात है।
कुछ देर तक दोनों बातें करते रहे ।
दूसरे दिन अमित चला गया!
सुनैना को अमित के बिना स्कूल काटने को दौड़ता.. हर जगह उसकी यादें बिखरी हुई थीं,,, वो साथ था तो सुनैना को इस बात का कभी एहसास ही नहीं हुआ था कि वो उसकी आदत बन गया है।
जब उसने अपना लंच बॉक्स खोला तो उसे रोना आ गया.. बहुत कोशिश की उसने खुद को रोकने की पर आँसू भी जिद्दी थी अमित की तरह बिना रुके आँख से बहते ही जा रहे थे ।
तभी रेखा पास में आकर उसके आँसू पोंछती है और उसे लंच करने के लिए बोलती है!
सुनैना : बिल्कुल भी मन नहीं है खाने का..
रेखा : तेरा हीरो आकर के मेरी जान ले लेगा खाले यार।
अमित मुझसे तेरा ध्यान रखने का बोलकर गया है और सुबह ही उसका फोन आया था लंच टाइम में तुझे लंच करवा दूँ!
अगर ऐसा चाहने वाला मुझे मिलता ना तो मैं तो उसके लिए कुछ भी कर लेती!
सुनैना : चल साथ में खाते हैं!
रेखा : अब से हम दोनों लंच साथ में करेंगे!
रात को अमित का मेसेज आता है कॉलेज का पहला दिन कैसा रहा, क्या क्या किया, हॉस्टल का कमरा कैसा है, रूम पार्टनर के बारे में बताया शोभित.. कलकत्ता का रहने वाला है जीनियस है!
तुम्हारे बारे में बताया मैंने उसे,उसकी कोई गर्ल फ्रेंड नहीं है!
सुनैना ने उसे अपनी दिनचर्या बताई स्कूल में क्या_क्या हुआ..
और तुम तो अपना बॉडी गार्ड छोड़ गए हो न मेरे पास....?
अमित : क्या करता..?
जानता था तुम अकेले लंच नहीं खाओगी!
सुनो तुम अपना ध्यान रखना मेरे लिए!
सुनैना : तुम भी अमित अपना ध्यान रखना मेरे लिए प्लीज ।
ऐसे ही दिन निकलने लगे..!
छुट्टियों में जब अमित आया तो उसने रेखा को बता दिया था पर सुनैना को बताने के लिए मना कर दिया था,, सुनैना को उसने एक दिन बाद आने का बताया था!
रेखा अमित को भाई मानती थी!
अमित रेखा के घर कभी भी आ सकता था! रेखा के माँ, पापा और छोटा भाई सब अमित को बहुत पसंद करते थे!
रेखा सुनैना के घर गई और उसकी मम्मी को बोला कि वो घर पर अकेली है उसके मम्मी पापा गाँव में दादी को देखने गए हैं वो बीमार हैं!
रात तक वो लोग वापिस आ जाएंगे!
सुनैना की मम्मी सुनैना को रेखा के साथ भेज देती हैं!
घर पहुँच कर रेखा बोली तू मेरे कमरे में बैठ में कुछ खाने के लिए बनाकर लाती हूँ.. ठीक है! सुन..
हाँ, बोल..
अदरक डाल कर चाय भी बना ले!
जी मेडम और कुछ..?
अभी के लिए इतना ही ठीक है!
रेखा का छोटा भाई पड़ोस में अपने दोस्त के घर पर खेल रहा था!
मोबाइल पर अमित का मेसेज देख कर रेखा धीरे से दरवाजे को खोलती है और उसे बता देती है उसकी जिंदगी अंदर है!
अमित.. रेखा के सर पर हाथ रख.. थैंक यू डियर सिस्टर!
इतना तो अगर मेरी सगी बहन होती तो वो भी नहीं करती ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वो तुम्हें हर खुशी दे!
अमित रेखा के रूम का दरवाजा धीरे से खोलता है सुनैना बिस्तर पर उल्टा लेटकर कोई किताब पढ़ रही थी.. अरे वाह इतनी जल्दी बना लाई तू.. भूख के मारे मेरी तो जान ही निकल रही थी बोलकर वो जैसे ही मुड़ती है अमित को सामने देख कर उसे यक़ीन ही नहीं होता..
अमित : क्या हुआ..?
तुम कल आने वाले थे ना.. सुनैना की आँखों में आँसू आ जाते हैं वो बोल नहीं पाती!
अमित :उसे अपने गले से लगा लेता है..!
कुछ देर तक दोनों चुपचाप रहते हैं जैसे बिना बोले ही उनकी धड़कने दिल का हाल एक दूसरे से कह रही हों!
अमित : एक किस कर दो..
सुनैना : गर्दन हिलाकर मना कर देती है!
अमित उसका चेहरा अपने हाथों से ऊपर कर उसकी आँखो में देखता है.. जिनमें आँसू ठहरे हुए थे..
बारिश के पहले जैसे आकाश में बादल छाए हुए रहते हैं! अमित उसके होंठो को अपनी उंगली से छूता है.. कितने सॉफ्ट हैं.. क्या लगाती हो तुम बताओ ना मेरे होंठ तो छूने पर लगता है उंगली किसी चुभने वाली चीज पर रख दी..
दिखाओ उसके होंठो को छूती है और उसकी आंखों में शैतानी देख कर अपनी बेवकूफी पर हँसी आ जाती है उसे..
अमित : तुम्हारी उँगली कटी तो नहीं दिखाओ?
सुनैना : तुम हमेशा चीटिंग करते हो
अमित : अभी क्या किया.. सच ही तो कहा तुम्हारे होंठ सॉफ्ट हैं और मेरे..
सुनैना : तुम्हारे भी सॉफ्ट हैं तुमने झूठ बोला मुझे।
अमित :सच्ची में ?
तो किस करने के लिए मना क्यूँ कर रही हो ?
सुनैना : गुस्सा से उसको देखती है! फिर से उसकी बातों में उलझ गई थी वो!
अमित : मुझे जाना है.. और अब मिल भी नही पाऊँगा!
आ जाओ ना थोड़ी साँसे मिल जाएंगी
सुनैना उसके पास आ कर हर बार तुम मुझे चीट करते हो..
अब नहीं करूँगा!
वो सुनैना को किस करता है.. सुनैना तुम नहीं करोगी..?
प्लीज.. सुनैना उसकी बात कभी नहीं टालती थी!
कुछ देर के लिए वो भूल गए थे कि उनके अलावा भी कुछ और है दुनियाँ में..
पर सब कुछ चाहने से नहीं होता ये नज़दीकी उन्हें दूर जाने की इजाज़त नहीं दे रही थी पर जाना था।
शुक्रिया जिंदगी!
तुम्हारे प्रेम का कर्जदार हूँ.. सोचता हूँ कैसे चुकाऊंगा..!
तब तक रेखा पोहा चाय लेकर आवाज़ लगाती है!
अमित : आ जाओ सिस्टर..
तीनो साथ में खाते हैं.. कुछ देर बातचीत के बाद अमित बोलता है देखो मेरा अब यहां आना नहीं हो पाएगा ।
तुम लोग अच्छे से अपने एक्जाम की तैयारी करो... अब हम कालेज में ही मिलेंगे!
समय निकलता जाता है एक्जाम के बाद रिजल्ट आ जाता है सुनैना और रेखा दोनों अमित के कॉलेज में एडमिशन ले लेती हैं और अब अमित और सुनैना आमने सामने हैं..
अमित : देखो मैंने इस बार चीट नहीं किया पहले तुम्हारे पास आ गया!
अब तुम जल्दी से नाश्ता करो मुझे जाना है लेट हो रहा है.. ।
सुनैना : ठीक है बाबा खाती हूँ!
अमित : तुम्हें मेरी एक बात माननी पड़ेगी प्रॉमिस करो!
सुनैना : पक्का प्रॉमिस!
अमित : तुम इस कॉलेज में भी टॉप करोगी.. बोलो ?
सुनैना : हाँ।
मेरे लेप टॉप मैं तुम्हारे लिए कुछ सरप्राइस है जब मेरे रूम आओगी तब देखना..!
अगर मैं कॉलेज से किसी काम से बाहर जाऊँ तो शोभित से बोलना जो भी दिक्कत हो!
अमित : चलता हूँ जिंदगी.. इस बार तुमने मुझे चीट किया!
सुनैना : उसकी बातें सुनकर हैरान होती है सुबह इतनी जल्दी केंटीन में!
मुड़कर देखती है कोई भी नहीं था.. सब बंद था वो अकेली टेबिल पर बैठी हुई थी!
तभी रेखा का कॉल आता है.. कहाँ हो तुम!
सुनैना जल्दी से वहां से अपने रूम में जाती है रेखा का रोता चेहरा देख घबरा जाती है..
अमित..
क्या हुआ.. अमित से ही मिलकर आ रही हूँ!
अमित इस दुनियाँ में नहीं है एक महीने पहले कॉलेज में सीढ़ियों से फिसलने पर उसके सर पर गहरी चोट लगी जब तक हॉस्पिटल ले कर गए ज्यादा खून निकलने की वजह से उसकी मौत हो गई!
अमित जब तुमसे मिलने आया था उस दिन उस समय ही उसके प्राण निकले!
बहुत खुश था वो उस दिन जाने की सारी तैयारी करके उसने शोभित को बताया की वो तुमसे मिलने जाएगा..उसके माँ पिता भी यहीं आने वाले थे दूसरे दिन उसके पापा ने यहीं अपनी पोस्टिंग करवा ली थी इसलिए वो तुमसे मिलना चाहता था और ये बताना भी की अब उसका तुमसे वहाँ पर मिलना नहीं हो पाएगा!
उसके माँ पिता को भी नहीं पता था कि जिसके लिए अपना ट्रान्सफर करवाया उन्होंने उसने इस दुनिया से ही अपना ट्रान्सफर करवा लिया!
तुम्हारे लिए हर दिन एक लेटर लिखता था कि जब मिलूंगा तो सुनैना को सारे लेटर एक साथ दूँगा और उसे बताऊँगा कि मैं उसे कितना मिस करता हूं ।
ये साल जल्दी से निकले और सुनैना भी यहाँ पढ़ने आ जाए वो यही इंतज़ार कर रहा था!
नियति इतना क्रूर मज़ाक करेगी उसके साथ ये तो वो सपने में भी नहीं सोच सकता था!
पर समय ने उसकी बुद्धि वैसी ही कर दी थी वो सब लिखकर रख रहा था जैसे बहुत जल्दी थी उसे तुम्हें सब कुछ बताने की!
. सुनैना चीखना चाहती थी.. पर उसकी आवाज़ ही नहीं निकल रही थी आंसू आँखों में ही जम कर रह गए किस का यक़ीन करे!
रेखा के घर पर जो उसे मिला उससे प्रॉमिस लिया..
या मोबाइल पर मेसेज... या अभी केंटीन का ???
ये नहीं हो सकता है वो बोली।
ये हो चुका है रेखा ने कहा।
बहुत से लोगों ने केंटीन में अमित को अकेले बैठ कर इंतज़ार करते देखा है.. अमित की मौत के कुछ दिन बाद से ही केंटीन को बंद कर दिया गया! अगर तुम्हें यक़ीन नहीं है तो चल कर देख लो!
तब तक शोभित भी आ जाता है! वो अमित का लेपटॉप, लेटर'स सुनैना को देता है!
सुनैना को अमित की बात याद आती है जो उसने अभी कुछ देर पहले केंटीन में कहा था कि अगर मैं किसी काम से कहीं जाऊँ और तुम्हें कुछ भी ज़रूरत हो तो शोभित से कहना !
वो फूट फूट कर रोने लगती है और जो भी अभी केंटीन में अमित ने उससे कहा वो सबको बताती है!
शोभित उसे चुप कराता है वो बोलती है मैंने अमित से जो प्रॉमिस किया है मैं उसे पूरा करूंगी।
आज से मेरा एक ही मकसद है मुझे कॉलेज में हर हाल में टॉप करना है..
वो मोबाइल देखती है उसमें अमित का कोई मेसेज नहीं था!
वो सबके साथ नीचे जाती है केंटीन खुलवाती है उसी टेबिल पर जाकर बैठती है जिस पर कुछ देर पहले अमित के साथ थी!
उसे याद आता है जिंदगी इस बार तुमने मुझे चीट किया.. उसकी आँखों से आँसू झरने लगते हैं..!
__राधा श्रोत्रिय"आशा" ✍️
*कहानी समाप्त*
*ये एक कलपनिक कहानी है! इसका किसी भी व्यक्ति या समाज से कोई लेना देना नहीं है इसका मेसेज है अगर दुनियां में नकारात्मक शक्तियां हैं बुराई,डर है.. तो अच्छाई भी है.. हम जिस किसी भी भगवान को मानते हों उन पर श्रद्धा पूरी हो तो वो हर तकलीफ में हमारी सहायता करते हैं!
जिस तरह छोटा बच्चा माँ की गोद में निश्चिंत हो सोता है उसे विश्वास माँ पर होता है! *
"प्यार में वो ताकत होती है जो इंसान को जीवन मृत्यु से परे ले जाती है..!!"
_राधा

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