श्रापित शब्द सुनते ही ऐसा लगता है, जैसे कितनी नकारात्मकता से भरा हुआ है.जीवन में कुछ भी श्रापित नहीं होता है .ऐसा मेरा मानना है हो सकता है मेरे विचार से कुछ लोग सहमत न हो.
परमात्मा ने सब चीजें इतनी अच्छी ,इतनी सुंदर ,बहुमूल्य बनाई है ,तो वह श्रापित कैसे हो सकती है ?

हां हमारा नजरिया ही उसे श्रापित बना देता है, क्योंकि हम उस में छुपी हुई वह सकारात्मकता देख नहीं पाते हैं.समझ नहीं पाते हैं.इसलिए हमें वह हर  वस्तु ,इंसान ,सड़क व किले सब श्रापित लगते हैं.
क्यों है वह श्रापित ?

पर क्या है उनके पीछे की कहानी ?

कभी हमने जानने की कोशिश नहीं की ,अगर हम ध्यान से उन चीजों के पीछे जुड़ी कथाओं, कहानियों को सुनें ,सोचे तो पता लगे ,जैसे रानी पद्मावती ने जौहर किया था क्यों किया था ?
लोग कहते हैं वहां पर आत्माएं घूमती हैं . श्रापित है क्या ऐसी कई जगहे. ?

श्रापित क्यों हैं ?

उनके पीछे छुपे की कहानियां ,दर्द, तकलीफ किसी ने समझी नहीं ,जानी नहीं ,सिर्फ किसी ने कुछ कह दिया तो उसी नकारात्मकता को आगे हम फैलाते चले गए, बढ़ाते गये. और उसे श्राप का नाम दे दिया जाता है, क्या यह जो आजकल इस संसार में हो रहा है ,वह श्रापित नहीं है ,कि हम मानव अपने जीवन के लिए नई -नई सुविधाएं उत्पन्न कर रहे हैं .प्रकृति का सर्वनाश कर रहे हैं ,तो क्या हम श्रापित नहीं है .इस पृथ्वी का सर्वनाश करने में सबसे बड़ी तो मनुष्य जाति श्रापित खुद में ही हो गई. 
तो हम किसी वस्तु को या किसी चीज को श्रापित कैसे कह सकते हैं ,आज संसार में औरतों को लेकर इतना बुरा हाल है ,उसके जीवन को ,उसके शरीर पर तो क्या वह श्रापित है, या जो उसे बुरी नजर से देख रहा है वह श्रापित है.
लड़कियों को आगे बढ़ने नहीं दिया जाता, पढ़ने नहीं दिया जाता.गांव में , पिछड़े इलाकों में यहाँ तक की शहरों में भी बुरा हाल है . तो श्रापित वह मेरे हिसाब से गांव , शहर और वह लोग हैं जो उस कन्या को आगे बढ़ने नहीं दे रहे श्रापित वह सभी लोग हैं, जिनकी सोच नकारात्मक है जीवन को लेकर,.
किसी व्यक्ति विशेष को लेकर किसी स्थान को लेकर की वह श्रापित  है तो इसका मतलब उनकी सोच नकरात्मक उनकी सोच श्रापित है.


                           सरोज