सूर्य की तरह या सूर्य के मुख्य जैसा.
मुझे लगता है ,कि हर प्राणी अपने संसार का एक सूरज होता है .जिसे चमकने का, खिलने का अधिकार है .प्रकृति में बहुत सी ऐसी चीजें हैं ,जो हमें बहुत कुछ सिखाती है.पर शायद हम नजरअंदाज कर देते है उन चीजों पर ध्यान नहीं देते .जो जीवन जीने की कला सिखाती है.प्रकृति की गोद में रखी हर चीज चाहे वह फूल, पक्षी, दरिया हो ,पहाड़ हो, सूरजमुखी भी उनमें से एक है .
सूरजमुखी का जो फूल है वह सूर्य की और अपना मुंह करे रहता है.सुबह से लेकर शाम तक यानी हर परिस्थिति में चाहे सूर्य की किरणें तेज पड़ रही हो या सुबह की ठंडी ठंडी धूप हो या शाम का सूर्य अस्त होने का समय. सूरजमुखी सूर्य को ही देखता रहता है .यानी हमें सीखना चाहिए, कि कैसे परिस्थितियों को हमें स्वीकार करना चाहिए क्योंकि कैसी भी धूप हो सूरजमुखी स्वीकार कर रहा है, तो हम मनुष्य स्वीकार क्यों नहीं कर पाते हैं. परिस्थितियों को स्वीकार न करना जीवन में हमारे संघर्ष बढ़ाता है ,और बढ़ता ही रहता है जिस कारण हमें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है .और जिससे हमारा आत्मबल कमजोर होने लगता है .हम गलत रास्तों पर चले जाते हैं, या हमारी बुद्धि काम करना बंद कर देती है.
हम चिढ़चिड़े हो जाते हैं.लोगों पर अपना गुस्सा निकालते हैं.तो क्यों ना हम सूर्यमुखी की तरह बन जाए, जो हर परिस्थिति में सूर्य की ओर देखता रहता है सहर्ष स्वीकार करता है .अगर हम भी हर चीज को आराम से स्वीकार कर ले ,उसको सोचे समझे ,तो जीवन का संघर्ष कम होगा.आंतरिक और बाहरी लड़ाई बंद हो जाएगी, जिस कारण हम एक श्रेष्ठ मानव बन पाएंगे. हम भी उत्पादक बन पाएंगे विचारों के द्वारा अपने कामों के द्वारा.
एक अच्छा सृजन कर पाएंगे अपने अंदर के एक मनुष्य का.
सरोज

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