मेर शहर में आज दरिंदगी हुई है
3 साल की बच्ची शिकार हुई है
मातारानी के पांडाल में ही
बच्चो के साथ खेल रही थी
नहीं समझ थी उसको 
अब्दुल चाचा कहती  थी जिसको 
बुलाया बच्ची को अपने पास
ऑटो में घूमने चलोगी तुम मेरे साथ
तुम्हें चॉक्लेट भी दिलवाऊंगा 
बहुत सारा घुमाऊंगा
सुनकर उसकी बातें  
आ गए बच्चे सारे 
हम भी चलेंगे घूमने
हम भी चलेंगे घूमने
सुन्नकर बच्चों की बातें 
भगा दिया सबको ऑटोचालक ने 
3 साल की बच्ची को उठाया
और अपने ही ऑटो में 
पीछे बाली सीट पर बिठाया 
थोड़ी ही दूर अपना ऑटो बढ़ाया
बेशर्मी की सारी हदें पार हुई
एक छोटी सी बच्ची 
हैवानियत का शिकार हुई
बच्ची दर्द से चीखी चिल्लाई
किसी को उसकी आवाज़ नहीं आई
हवस मिट गई तन मन की
खुशी मिल गई उसको जीवन की
इतनी छोटी बच्ची को कुछ समझ नहीं 
यह किसी को कुछ बता पायेगी ही नहीं 
इसी सोच के साथ वापस जाकर
छोड़ दिया पंडाल में आकर 
दर्द से कराहती बच्ची 
पहुँच गई अपने घर
बच्ची को दी गई थी
गुड टच बेड टच की शिक्षा
दादी को बता दिया सबकुछ आकर 
बच्ची के मम्मी पापा दादी 
पहुँच गए ऑटोचालक के घर 
जाकर वहाँ पता किया 
वो तो पहले ही घर से फरार हो लिया
पुलिसथाना में रिपोर्ट लिखाई गई है।
एक बच्ची हैवानियत का शिकार हुई है
मेरे शहर में आज दरिंदगी हुई है 

यहॉं नहीं कह सकती मैं
रिवाल्वर चाकू टांगो उसकी कमर में 
क्योंकि वो बहुत छोटी बच्ची है भाई 
हैवानों को यह बात क्यों समझ नहीं आई
उस मनहूस को क्या दिखा बच्ची में
जो उसकी हवस जाग गई।
हवस नहीं यह बीमारी है 
जिसे जड़ से खत्म करना होगा 
सजा के तौर पर हवस पैदा करने बाली 
उस जड़ का कत्ल करना होगा।
क्यों इंसानियत इतनी गिरती जा रही है?
क्यों रेपिस्ट की लिस्ट लम्बी होती जा रही है?
क्यों दंड की लिस्ट गिरती जा रही है?
क्यों मासूमो का बचपन छीना जा रहा है?
आरोपी आरोप करने से पीछे नहीं हटता
कानून क्यों सजा देने से पीछे हटता है
क़ानून सालों बाद सजा देने की हिम्मत कर पाता है
तब तक 1000 केसों की लिस्ट सामने आ जाती है
बस यही कारण है कि आरोपियों की लिस्ट लंबी
व सजा की लिस्ट ना के बराबर है।
हैवानियत जोरो शोरो पर है 
दण्ड का नाम बस रोड़ों पर है।



                         अंतिमा बंसल