जिनसे टकराके न बिखरे एहसास मेरे
वो किनारे दे दे।
मै नदिया हूँ मुझको धारे दे दे,
बहुत उदासियों से भर गया है जहन मेरा,
जो दिल को बागवान कर दें वो किनारे दे दे।
अब और सहन से लिपटकर रोया नहींजाता हमसे,
अपने मखमली कंधों के सहारे दे दे।
यह कैसे रिश्ता है हमारे दरमियान पूछे है दिल,
मेरी तो समझ में नही आता तो ही कुछ इशारे दे दे।
जिनमें खो के रह जाये मेरा हरएक दर्दो गम ,
न बोल न सही जुवां से आंखों से कुछ तो इशारे दे दे।
बस यही इल्तजा है अलबिदा होने से पहले,
तमाम उम्र जो रूह को सुकुने बख्से वक्त के कुछ ऐसे नजारे दे दे।
बिना माँगे दुनियाँ में कुछ नही मिलता,
पर कुछ भी माँगने को दिल नही करता,
जो तेरे दिल में आये हमें वो हक हमारे दे दे।
पैमाने जाम मुबारक हो तुझे तेरे,
मयखाने भी तेरे तुझको मुबारक,
बस मुझे चन्द नजरों के सरारे दे दे।
अंजू दीक्षित
बदायू उत्तरप्रदेश

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