जतिन देखो ना! यह तितली मेरे पकड़ में नहीं आ रही है। इतनी तेज उड़ रही है यह फूलों पर बैठती है। जैसे ही पकड़ने जाती हूं यह तुरंत ऊपर तक उड़ जाती है।  जतिन मुझे वो तितली पकड़ कर दे दो ना ! देखो कितनी प्यारी है तितली!
जतिन तितली के पीछे दौड़ता है और बहुत मुश्किल से तितली को पकड़ कर निधि को देता है। निधि खुशी से उछलने लगती है। "जतिन तुम कितने अच्छे हो"! मेरा कितना ख्याल रखते हो।" इसी तरह तुम हमेशा मेरा ख्याल रखोगे ना"! 
" निधि ! यह भी कोई पूछने की बात है । मैं तो तुम्हारा सबसे घनिष्ठ सखा हूं ना ! तुम कभी भी मुझसे कुछ मांग कर देख लेना मैं पीछे नहीं हटूंगाः" यह मेरा वादा रहा तुमसे ! 
ये दो मासूम बच्चे सारे जहान को भूलकर अपने मे मस्त थे।
जतिन और निधि एक ही कॉलोनी में रहते थे ।उनके घर भी आसपास में ही थे। कॉलोनी में और भी बच्चे  साथ खेलते थे लेकिन इन दोनों बच्चों का आपस में अधिक स्नेह था।  जतिन निधि का बहुत ध्यान रखता था ।जतिन निधि से उम्र में थोड़ा बड़ा था ।
कहते हैं समय के भी पंख होते हैं।ये बच्चे अब वयस्क हो चुके थे।
निधि के पापा का ट्रांसफर दूसरे शहर में हो गया। निधि के जाने की बात सुनकर जतिन बहुत उदास हो गया। वह मन ही मन में निधि की तरफ आकर्षित हो गया था लेकिन उसे यह नहीं पता था की निधि भी उसे चाहती है या नहीं, लेकिन वह निधि की उतनी ही परवाह अभी भी करता था जितना कि  करता आया था। निधि भी जतिन की बहुत परवाह करतीे थी। अपनी हर बातें उसे बतातीे थी।
निधि ने उससे  कहा--" " जतिन मैं चली जाऊंगी तुम्हें मेरी याद आएगी? तुम मुझे भूल तो नहीं जाओगे ? 
जतिन कुछ नहीं बोला । निधि से अलग होने की सुनकर उसकी जुबान ही बंद हो गई थी । निधि ने कहा-" जतिन अभी तक मैंने तुमसे एक बात छुपा कर रखी थी"। तुम्हारे दोस्त "विशेष"को पसंद करने लगी हूं लेकिन मुझे यह नहीं पता है कि वह भी मुझे पसंद करता है कि नहीं। वह तुम्हारा दोस्त भी है। तुम पता करके मुझे बताना कि वह मेरे बारे मे क्या सोचता है"।निधि की बातें सुनकर जतिन के सामने एकदम अंधेरा छा गया । वह सोच रहा था मुझसे सभी बात शेयर करने वाली निधि इतनी बड़ी बात छिपा गई।
निधि अपनी धुन मे खोई उससे बातें किए जा रही थी।
आज शाम को जतिन कीे मम्मी ने निधि के घर वालों को खाने पर बुलाया था । रात के 11:00 बजे तक दोनों परिवार एक साथ बातें कर रहे थे । बातों बातों में निधि कीे शादी की बात चली । निधि की मम्मी भी जतिन को पसंद करती थी और उसे अपना दामाद बनाना चाहती थीं। उन्होंने जतिन के के मम्मी पापा से बात किया। उन लोगों को भी कोई आपत्ति नहीं थी।आखिर उनलोगों ने भी इन बच्चों को हमेशा साथसाथ देखा था। उन्हें यह लगता था कि जतिन भी मना नहीं करेगा।

जतिन के पापा ने कहा --" तुम दोनों खुश हो ना बचपन सेतुम दोनों साथ में रहे हो अब अपनी आगे की जिन्दगी भी  साथ में गुजारना। मैं तुम लोग के इंगेजमेंट की तारीख पक्की कर दूंगा , जाने के पहले तुम लोग की इंगेजमेंट कर देंगे"। जतिन बोला--" नहीं पापा ! मैं और निधि केवल एक अच्छे दोस्त हैं इससे आगे तो मैंने कभी सोचा ही नहीं है"। दोनों परिवार स्तब्ध रह जाते हैं यह कैसे हो सकता है। निधि की इतनी परवाह करने वाला लड़का उससे विवाह करने के लिए मना कर रहा है । 
बात वहीं पर खत्म हो गई ।वे लोग निधि के परिवार को विदा करने  दरवाजे तक जाते हैं। निधि उसे कहती है --" जतिन तुम्हें   अपना वादा याद है ना" ! जतिन नेउसे जवाब दिया--" निधि मैंने बचपन में भी तुमसे वादा किया था कि तुम मुझे हमेशा अपने साथ पाओगी" ।" मैं तुम्हारे हर फैसले में तुम्हारा साथ दूंगा "।आज मेरा तुमसे यह वादा रहा कि मैं विशेष को तुमसे मिलवा कर रहूंगा किसी भी हाल में"। 
निधि उससे गले मिलती है। वह.उससे गले लगकर मन ही मन में कहताहै-- मैने तुमसे टूटकर प्यार किया है "निधि"! मैं अपने प्यार को उदास नहीं देख सकता। तुम्हारी आंखों मे कभी आंसू नहीं आने दूंगा। ये मेरा आखिरी वादा रहा तुमसे। मुझे अपने आंसुओं की कोई परवाह नहीं है।



                   स्नेह लता पाण्डेय
                      नई दिल्ली