चल ना यार इस बार कहीं घूमने चलते हैं वैसे भी बहुत दिनों से भी कहीं नहीं गए इस बार हम सब साथ में पूरा ग्रुप इतना कहते हुए राहुल भी विजय और प्रीति के सामने वाली कुर्सी पर कॉलेज की कैंटीन में बैठ गया।
विजय बोला हां यार चलो इस बार सब मिलकर कोई प्लान बनाते हैं।
लेकिन हम लोग जाएंगे कहां प्रीति ने सवाल करते हुए पूछा
अरे पहले सबको तैयार तो करो फिर कहीं ना कहीं तो चले ही जाएंगे राहुल ने विजय के हाथ पर हाथ मारते हुए कहा
ठीक है मैं शालिनी और रजनी से बात करती हूं फिर हम पांचों जरूर कहीं ना कहीं चलेंगे।।।
इतना बोल कर प्रीति वहां से उठकर अपने क्लास की तरफ जाने लगी और उसे रास्ते में ही शालिनी भी मिल गई।
क्लास खत्म करके शालिनी और प्रीति ने रजनी को ढूंढा और फिर वह तीनों कॉलेज के गेट के बाहर इंतजार कर रहे राहुल और विजय के साथ आकर खड़ी हो गई।
विजय कार लेने चला गया और राहुल ने उन सब से पूछा तो फिर कब का प्लान है चलने का???
अरे यार ऐसे कैसे प्लान बना ले पहले घर में तो पूछना पड़ेगा ना शालिनी ने कहा
हां तो ठीक है घर जाओ मैं कब कह रहा हूं कि यहीं से चल चलो पहले घर जाओ भी पूछो फिर कल तक सब लोग बता देना एक दूसरे से।।।। राहुल ने कहा
अब तक विजय कार लेकर भी आ गया था प्रीति आगे की तरफ कार में विजय के बगल में बगल वाली सीट पर बैठ गई और रजनी शालिनी और राहुल पीछे बैक सीट पर बैठ गए।।।।
फिर सब वहां से सब अपने अपने घर चले गए।। रजनी शालिनी की छोटी बहन थी और शालिनी और राहुल एक दूसरे से प्यार करते थे।।
तो वहीं प्रीति विजय की गर्लफ्रेंड थी।।।शालिनी राहुल प्रीति और विजय चारों एक ही कॉलेज में सेम क्लास में पढ़ते थे और रजनी उनसे 1 साल छोटी व उनकी जूनियर थी।।
वह लोग अक्सर ही प्लान बना कर एक साथ कहीं ना कहीं घूमने जरूर जाते थे।।। यह कोई पहली बार नहीं था जब वह इस तरह से एक साथ पांचो घूमने जा रहे थे।
अपने अपने घर पर बता कर व पूछ कर शाम को ही सब ने एक दूसरे को कॉल करके बता दिया कि हां बोलो कब तक चलना है क्या प्लान है।।।
सब प्लान राहुल और विजय का ही था तो उन लोगों ने ही जाने की जगह भी तय करी और बोला कि सब लोग आज शाम 6:00 बजे निकलेंगे अपने-अपने घर से और कहां चलना है ? सरप्राइस है रास्ते में बताएंगे।।।
विजय ,राहुल और प्रीति सबसे लास्ट में रजनी और शालिनी को उनके घर से लेने के लिए आए।। फिर जब वह दोनों भी कार में बैठ गई तो तीनों लड़कियों ने उत्सुकतावश उन दोनों से पूछा- अरे यार बताओ तो कहां जा रहे हैं हम लोग इतना ज्यादा भी सरप्राइस मत रखो।।।।
यह सुनकर विजय बोला- पहले यह बताओ तुम लोगों में से किसी को भूत भूत से डर तो नहीं लगता है लगता हो तो बता दो अभी वापस चली जाओ घर।।।।
यह सुनकर शालिनी बोली- फालतू बातें मत करो विजय तुम जानते हो भूत भूत कुछ नहीं होता है और हम लोग भी जानते हैं आप साफ-साफ बताओ कि हम लोग कहां जा रहे हैं???
यह सुनकर राहुल बोला अच्छा अच्छा बता रहे हैं बता रहे हैं- इस बार हम लोगों में सोचा चलो कुछ डेरिंग करते हैं और वैसे भी हम लोग तो जानते हैं भूत वूत कुछ होता नहीं है मगर यहां से कुछ 140 किलोमीटर की दूरी पर एक किला है जहां पर शाम के बाद जाना मना है।।।तो इस बार हम लोग वही घूमने जा रहे हैं और आज रात में वहीं रुकेंगे ठीक है किसी को कोई प्रॉब्लम हो तो बता दो अभी।।।
यह सुनकर प्रीति बोली अरे यार क्या प्रॉब्लम होगी कोई प्रॉब्लम नहीं है चलो ना चलते हैं मजा आएगा।।।
वह सब ही उस किले पर पहुंचने के लिए बहुत ही ज्यादा उत्साहित थे और जल्दी से जल्दी वहां पहुंचना चाहते थे यह सब बातें सुनकर उन चारों में से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था सिर्फ रजनी ही थोड़ा सा डरी हुई थी।।
लेकिन वह भी कुछ नहीं बोल रही थी क्योंकि वह भी भूत प्रेत इन सब चीजों में नहीं मानती थी और यह भी जानती थी कि अगर उसने जाने से मना किया तो उसके दोस्त बाद में उसका बहुत मजाक उड़ाएंगे कि वह डरपोक है.... यह सब मन में सोच कर वह चुप ही रही और उन लोगों की हां में हां मिलाती रही हर बात में।।।
लगभग 2 घंटे ड्राइव करने के बाद वह लोग आखिर उस जगह पर पहुंच ही गए और किले से थोड़ी दूरी पर ही विजय ने कार रोक दी या शायद कार खराब हो गई थी तो उसने स्टार्ट करने की दोबारा कोशिश की तो कार स्टार्ट नहीं हुई तो यह देख कर सब ने बोला अरे यार रहने दे क्यों कोशिश कर रहा है स्टार्ट करने की सामने थोड़ी दूर पर ही तो दिख रहा है किला.... हम लोग पैदल चल कर चलते हैं.....
इतना कहकर वह सभी लोग कार से बाहर निकले अपने अपने बैग लेकर उन सभी ने बैग अपनी पीठ पर टांग रखे थे और हाथों में मोबाइल पकड़ा हुआ था और विजय के हाथ में कार की चाबी भी थी उसने कार की चाबी अपनी जेब में रख ली और सब के साथ आगे बढ़ गया.....
उस जगह पर बहुत ही ज्यादा सन्नाटा था दूर-दूर तक कोई इंसान तो क्या कोई पक्षी या जानवर भी दिखाई नहीं पड़ता था पर उन लोगों को इन सब चीजों से कोई लेना-देना ही नहीं था और ना ही वह लोग इस बारे में सोच रहे थे उन्हें तो बस वह किला घूमना था और उसे अंदर से भी देखना था।।।
पैदल चलते वक्त रजनी ने उन लोगों से पूछा अच्छा यह तो बताओ इस किले की स्टोरी क्या है क्यों यहां आना मना है शाम के बाद???
यह सुनकर राहुल बोला ठीक तरह से तो नहीं पता पर कुछ अफवाह है कि इस किले से रात को बहुत भयानक तरह की चीखने की आवाजें सुनाई देती है और रात होने के बाद जो भी इस किले में जाता है वह कभी भी वापस लौट कर नहीं आता है।।।
रजनी राहुल जी यह सब बातें बहुत ही ध्यान से सुन रही थी तभी अचानक से विजय ने उसे पीछे से डरा दिया और वह अचानक से डर कर पीछे देखने लगी तो बाकी सब उस पर हंसने लगे और बोले रजनी डरपोक कहीं की.... तुझे यहां आना ही नहीं चाहिए था....
तभी राहुल बोला यार ऐसा कुछ नहीं है यह सब अफवाह है और थोड़ा बहुत तो मैंने भी ऐड करा ऐसी कोई अफवाह भी नहीं है शायद कि जो जाता है वापस नहीं आता है ज्यादातर लोग तो आते ही नहीं है ना शाम होने के बाद.... इतना कहकर वह मुस्कुराने लगा मजाकिया अंदाज में.....
तभी प्रीति बोली मैंने इंटरनेट पर पढ़ा है यह किला शापित है
युद्ध में जिस राजा ने यह किला जीता था उसने इस किले के एक हिस्से में आग लगवा दी थी जिससे उस हिस्से में छिपे कई लोग जिंदा ही जलकर मर गए थे।।। जलकर मरने वाले लोगों में कुछ साधु और ज्ञानी भी थे उन लोगों का उस राजा को श्राप लगा था और उस राजा की भी इस किले में रहस्यमई मृत्यु हुई थी और किले की बाकी लोग भी एक-एक करके मृत्यु को प्राप्त हुए थे।।।। बस तभी से यह किला वीरान पड़ा है और यह भी माना जाता है कि जो आत्मा इस किले के अंदर है वह कभी भी इस किले से बाहर नहीं आ सकती और जो भी इस किले के अंदर जाकर उनके रहस्य को जान लेता है वह या तो बाहर नहीं आता और अगर बाहर आ भी जाता है तो वह किसी को कुछ बताने लायक नहीं बचता।।।।
शालिनी रजनी विजय और राहुल चारों प्रीति कि इन सब बातों को पहले तो बहुत ही ध्यान लगाकर सुन रहे थे फिर अचानक ही चारों खिलखिला कर हंस पड़े और प्रीति से बोले बस कर यार तू बस कर अपना ज्ञान बांटना।।।
हमें नहीं जानना किले के बारे में हम लोग घूमने आए घूम कर वापस हम लोग को भी जाना है चलो चुपचाप अंदर अब।।।
यह सब सुनकर प्रीति ने कहा तो मैं कब कह रही हूं कि यह सब सच है वह सकता है सब अफवाह हो मगर मुझे जितना पता था मैंने तुम लोग को भी बता दिया बाकी मानो या ना मानो तुम्हारी मर्जी मैं कब बोल रही हूं कि यह सच है चलो चलो अंदर चलते हैं नहीं तो बोलोगे मेरी वजह से देर हो गई।।
इतना बोल कर वह पांचों जल्दी-जल्दी कदम बढ़ाने लगे और किले के अंदर प्रवेश कर गए उन लोगों ने कहा अच्छा चलो हम लोगों को पूरा किला घूमना है वह भी सुबह होने से पहले इतना बोल कर विजय ने बैग से अपना डिजिटल कैमरा निकाला और वीडियो बनाने लगा।।।
अंदर पहुंचकर थोड़ी देर घूमने के बाद उन लोगों ने आपस में एक दूसरे से कहा - कहां है भूत यहां मुझे तो कोई भूत प्रेत आत्मा कुछ भी नहीं दिख रहा पता नहीं कौन लोग होते हैं जो यह सब अफवाह फैलाते हैं??? प्रीति ने कहा
घूमते घूमते वह पांचो किले के उसी हिस्से के बहुत करीब पहुंच गए जो हिस्सा श्रापित था उस हिस्से के करीब पहुंचने पर उन सभी को कुछ अजीब सा महसूस हुआ पर उन सभी ने अनदेखा कर दिया सिर्फ रजनी ने मना किया हमें उस तरफ नहीं जाना चाहिए वैसे भी वह जगह घूमने के लायक नहीं लग रही उसने बहाना बनाते हुए कहा।।।।
लेकिन बाकी चारों कहां मानने वाले थे उन सब की बुद्धि भ्रष्ट हो चुकी थी वह कहते हैं ना" विनाश काले विपरीत बुद्धि" बस यही उन सभी के साथ भी सिद्ध हो रहा था।।।
उस किले के अंदर पहले से ही बहुत अंधेरा था उन सभी ने अपने अपने मोबाइल की फ्लैश जलाएं हुए थे और उसी की रोशनी में ही सब कुछ देख रहे थे लेकिन किले का यह जला हुआ हिस्सा देखने में ही और भी भयानक और डरावना लग रहा था मोबाइल के प्रकाश में भी यहां हिस्सा अंधेरे से भरा हुआ ही लग रहा था और कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था तभी सबसे पीछे चल रही प्रीति की एक चीख उन चारों को सुनाई दी लेकिन जब तक वह पीछे की तरफ मुड़े प्रीति वहां से गायब हो चुकी थी उन सभी का दिमाग ठनका विजय के हाथ से कैमरा छूट कर वहीं जमीन पर गिर गया और वह पागलों की तरह प्रीति प्रीति चिल्लाते हुए उसी दिशा में अकेले भागने लगा जिस तरफ से प्रीति के चीखने की आवाज आई थी यह देखकर बाकी बचे हुए तीनों लोग रजनी शालिनी और राहुल भी विजय को रोकने के लिए उसके पीछे भागे लेकिन जब तक वो उनकी आंखों से ओझल हो चुका था उन तीनों के तो जैसे होश उड़े हुए थे उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि ये सब क्या हो रहा है??? क्या किया जाए अपनी जान बचाकर किले से बाहर की तरफ भाग जाए या अपने दोनों दोस्तों की तलाश करें ।।।।
तभी राहुल, रजनी और शालिनी की तरफ देखते हुए बोला चलो चलते हैं यहां से यहां जरूर कुछ गड़बड़ है यह सुनकर रजनी थोड़ा घबरा कर बोली मैंने तो पहले ही बोला था इस तरफ नहीं आते देखते क्या हो गया ??
शालिनी ने कहा चाहे कुछ भी हो हम विजय और प्रीति को ऐसे अकेले छोड़कर अपनी जान बचाकर नहीं जा सकते यहां से बाहर.... हम सब दोस्त हैं और हम इतने स्वार्थी नहीं हो सकते हैं।।। राहुल ने कहा ठीक है फिर चलो उन्हें ढूंढते हैं हो सकता है वह लोग सही सलामत हो।।।। अब रजनी के अंदर इतनी हिम्मत तो थी नहीं कि वह अकेले ही किले से बाहर चली जाए तो वह भी उन दोनों के साथ चलने के लिए राजी हो गई।।।
वह तीनों एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए उसी दिशा में चलने लगे जिस तरफ से प्रीति की आवाज आई थी और विजय उसके पीछे भागा था कुछ दूर तक चलने के बाद उन्हें एक कमरा दिखाई दिया।।। वह उसी दुष्ट राजा का कमरा था जिसने उस किले के एक हिस्से में आग लगवाई थी।।। और श्राप के कारण ही उस राजा की आत्मा आज भी उसी कमरे में कैद थी।।। शालिनी और राहुल को यह बात पता नहीं थी तो उन दोनों ने उस कमरे का दरवाजा खोल दिया और जैसे ही उस कमरे का दरवाजा खुला उस राजा की आत्मा कैद से मुक्त हो गई और राहुल के शरीर में प्रवेश कर गई जैसे ही यह सब हुआ राहुल अचानक से बेहोश हो गया शालिनी और रजनी ने एक दूसरे का हाथ कसकर पकड़ लिया और उन्हें समझ नहीं आया कि यहां पर क्या हुआ और वह राहुल को उठाने लगी।।।
तभी दूसरी ओर से विजय के चीखने की आवाज सुनाई दी वह जोर जोर से चिल्ला कर कह रहा था नहीं प्रीति नहीं ऐसा मत करो मेरी बात सुनो।।।। राहुल को वहीं बेहोश छोड़कर शालिनी और रजनी , विजय की आवाज का पीछा करने लगी थोड़ी ही देर में उन्हें विजय दिखाई दिया जो कि ऊपर की ओर देख रहा था और उन लोगों ने भी जब ऊपर की ओर देखा तो वह दोनों हैरान रह गई और विजय के पास जाकर पूछा यह क्या हो गया प्रीति को???
विजय रोते हुए बोला सब मेरी ही गलती है मुझे इस मनहूस जगह पर आने का प्लान ही नहीं बनाना चाहिए था मुझे लगता है हम में से कोई भी नहीं बचेगा यह किला सच में श्रापित है और यहां कुछ बुरी शक्तियां भी है।।।
उन लोगों से कई मंजिल ऊपर की बालकनी के किनारे पर अस्त-व्यस्त से कपड़ों में प्रीति खड़ी हुई थी जो कि अपने होश में नहीं लग रही थी।।।
तभी अचानक विजय को जैसे कुछ याद आया और उसने रजनी और शालिनी से पूछा राहुल कहां है??
शालिनी ने घबराई हुई आवाज में विजय को बताया- हम लोग तुम्हें और प्रीति को ढूंढ रहे थे तभी हम दोनों ने एक कमरे का दरवाजा खोल दिया और तभी अचानक से राहुल बेहोश हो गया और वह उसी कमरे के बाहर बेहोश पड़ा है।।
उसी समय मैंने और रजनी ने तुम्हारी आवाज सुनी तो हम दोनों इस तरफ दौड़कर आ गए।।
उन लोगों की बात खत्म ही नहीं हो पाई थी तभी अचानक प्रीति ने ऊपर से छलांग लगा दी और विजय के पैरों के पास आकर गिरी और उसी क्षण सर फटने से उसकी मृत्यु हो गई
यह देखकर रजनी और शालिनी की चीख निकल गई और विजय पागल सा प्रीति की मृत शरीर के ऊपर गिर पड़ा और जोर जोर से रोने लगा प्रीति का नाम लेकर और वह यह भी कह रहा था कि यह सब मेरी वजह से हो रहा है मैं हीं तुम लोगों को यहां लेकर आया।।।।
यह सब देखकर शालिनी ने जल्दी से विजय को उठाया और और कहां तुम्हारी इसमें कोई गलती नहीं है हम सब अपनी मर्जी से यहां आए थे तो परिणाम भी हम सबको ही भुगतना होगा चलो अब चल कर राहुल को ढूंढते हैं और यहां से निकलते हैं।।।
विजय प्रीति के मृत शरीर को भी छोड़ कर जाने को तैयार नहीं था फिर शालिनी और रजनी ने उससे बहुत समझाया कि तुम अपनी गलती अब भी सुधार सकते हो हमें राहुल को कुछ भी होने से बचाना होगा।।।
यह सुनकर विजय को जैसे होश आया और उसने कहा चलो चल कर राहुल को ढूंढते हैं मैं अपनी प्रीति को तो बचा नहीं सका कम से कम अपने दोस्त को ही बचा सकूं यह सुनकर वह तीनों जल्दी से उसी कमरे के पास आ गए जहां रजनी और शालिनी ने राहुल को बेहोश अवस्था में छोड़ा था।।।।
लेकिन जब वो तीनों वापस आए तो राहुल वहां पर नहीं था यह देखकर कि तीनों ही घबरा गए राहुल राहुल जोर जोर से चिल्लाने लगे पूरे किले में उनकी आवाजें गूंज रही थी तभी अचानक से विजय के ऊपर पीछे से किसी ने हमला किया और वह जमीन पर गिर पड़ा।।।
रजनी और शालिनी ने पीछे मुड़कर देखा तो वह दोनों दंग रह गई वहां राहुल था उसका पूरा शरीर हवा में तैर रहा था.... उसकी आंखें लाल थी और चेहरा भी काला पड़ चुका था यह देखकर शालिनी जोर से राहुल का नाम लेकर चिल्लाई।।।
तभी वह बहुत ही भयानक आवाज में बोला तुम लोग यहां आ तो अपनी मर्जी से गए हो लेकिन जा नहीं पाओगे इस किले में जो भी आता है वह आज तक जिंदा बचकर बाहर नहीं गया इतना बोल कर वह अजीब सी हंसी हंसता है और अपने बड़े व नुकीले नाखून विजय के पेट में गड़ा कर उसके पेट को चीर देता है और विजय की वहीं मृत्यु हो जाती है यह सब दृश्य देखकर रजनी वा शालिनी बुरी तरह से डर जाती है और किले के मुख्य द्वार की तरफ वहां से बाहर निकलने के लिए भागने लगती है।।।
लेकिन काफी देर तक भागने के बाद भी उन्हें कोई मुख्य द्वार नहीं मिलता है वह दोनों भागकर एक जगह पर कोने में राहुल से बचकर छुपने लगती हैं। तभी रजनी रोते हुए शालिनी से कहती है कि अब हम दोनों नहीं बचेंगे दीदी हमें इस वीरान किले में आना ही नहीं चाहिए था हमने बहुत बड़ी गलती कर दी यहां आ कर।।।।
शालिनी अभी रजनी की बात सुन ही रही थी तभी अचानक शालिनी की नजर अपने गले में पहने हुए माता रानी के लॉकेट पर जाती है और वह उसे छूकर बोलती है नहीं रजनी माता रानी अब तक हमारी रक्षा कर रही थी इसीलिए हम दोनों अभी तक जिंदा है इतना कहकर वह अपने गले का लॉकेट उतारकर रजनी को पहना देती है और खुद राहुल के सामने चली जाती है और बोलती है राहुल याद करो तुम शैतान नहीं हो इस शैतान को खुद पर हावी मत होने दो लेकिन राहुल अब जिंदा नहीं था वह सिर्फ उसका मृत शरीर था जिस पर दुष्ट राजा की आत्मा का कब्जा था।।
वह अट्टाहस करते हुए बोला कौन राहुल यह मेरा किला है मैंने इसे जीता है मेरी मर्जी के बिना कोई भी यहां नहीं आएगा और जो आएगा वह जिंदा बचकर वापस नहीं जा पाएगा ।।। इतना कहकर वह जोर-जोर से हंसने लगा और उसने शालिनी की गर्दन को पकड़कर उसे भी हवा में उठा दिया।।।
रजनी वही एक कोने में छिपकर यह सब देख रही थी अब उससे रहा नहीं गया अपनी बहन को इस हालत में देखकर और उसमें ना जाने कहां से इतनी हिम्मत आ गई और उसने अपने गले का लॉकेट निकालकर राहुल के शैतानी शरीर पर फेंक दिया इससे उसकी पकड़ कुछ ढीली हुई और शालिनी जमीन पर गिर पड़ी।।।।
रजनी ने जल्दी से आकर शालिनी को वहां से उठाया उसे बोला दीदी जल्दी चलो यहां से.....हम लोग को यहां से निकलना होगा।।। यह सुनकर शालिनी ने रजनी से बोला पागल लड़की तूने लॉकेट अपने गले से क्यों निकाल दिया मैं ना सही कम से कम तेरी जान तो बच जाती।।।
नहीं दीदी मैं आपको अपनी आंखों के सामने मरता हुआ नहीं देख सकती थी यहां से बाहर निकलेंगे तो हम दोनों नहीं तो कोई भी नहीं इतना बोल कर वह दोनों एक दूसरे के गले लग गई।।।
और फिर खड़ी होकर भगवान का नाम लेकर एक तरफ भागने लगी और वहां से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढने लगी पीछे से उन्हें बहुत सारे लोगों के चीखने चिल्लाने की आवाजें आ रही थी लेकिन उन दोनों ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक ही दिशा में भागती रही और सीढ़ियों से नीचे उतर कर बाहर निकलने के लिए दरवाजे की तरफ भागी।।।
और वह दोनों दरवाजा खोलने ही वाली थी कि तभी पीछे से उन्हें अपने तीनों दोस्तों प्रीति, राहुल और विजय की आवाजें सुनाई दी वह आवाज डरावनी नहीं थी वह तीनों बहुत ही करुना भरे स्वर में शालिनी और रजनी का नाम पुकार रहे थे और सहायता के लिए चिल्ला रहे थे।।।
शालिनी, रजनी रुको हमें भी अपने साथ ले चलो हमें यहां मत छोड़ कर जाओ हम तुम्हारे दोस्त हैं।।। यह सभी आवाजें विचलित करने वाली थी।।।।
लेकिन यह सब आवाजें एक भ्रम जाल थी उनके दोस्तों की मृत्यु हो चुकी थी और उस किले में रहने वाली आत्माएं उनके दोस्तों की आवाज निकाल रही थी ।उन दोनों को भ्रमित करने के लिए।।।।
लेकिन शालिनी और रजनी यह बात नहीं जानती थी उन दोनों ने जब अपने दोस्तों की आवाज सुनी तो वह रुक गई और शालिनी पीछे मुड़कर देखने ही वाली थी कि रजनी ने उसका हाथ पकड़कर उसे अपनी ओर खींचा और बोली दीदी पीछे मत देखना वह सब हमारे दोस्त नहीं है हमारे दोस्त अब जिंदा नहीं है।।।
अगर हम दोनों को अपनी जान बचानी है तो हमें इस दरवाजे से बाहर निकलना होगा अभी बिना यहां रुके और बिना पीछे मुड़े..... रजनी ने शालिनी को समझाते हुए कहा।।।
पीछे से आ रही आवाजें और भी तेज होती जा रही थी फिर भी उन आवाजों को अनसुना करके शालिनी और रजनी किले के दरवाजे की तरफ बढ़ रही थी वहां से बाहर निकलने के लिए लेकिन शालिनी के मन में बहुत सी बातें चल रही थी वह वहां रुक कर अपने दोस्तों को बचाना चाहती थी मगर इन सबके लिए वह रजनी की जान को भी खतरे में नहीं डाल सकती थी।।।।
तो इसलिए उसने दरवाजे के पास पहुंचकर जैसे ही किले का मुख्य द्वार खोला और वो रजनी के साथ बाहर निकलने ही वाली थी तभी जैसे किसी ने पीछे से उसके कंधे पर हाथ रखा.... और शालिनी यह समझ गई कि वह यहां से जिंदा बाहर नहीं जा सकती लेकिन वह कैसे भी करके अपनी छोटी बहन रजनी को बचाना चाहती थी इसलिए दरवाजा खोलते ही उसने रजनी को दरवाजे से बाहर धक्का दे दिया और खुद किले के अंदर हमेशा के लिए कैद रह गई और दरवाजा उसके सामने ही बंद हो गया।।।।
रजनी जैसे ही किले से बाहर आई उसने देखा की शालिनी उसके साथ नहीं थी...... उसने जोर से चीखा.... शालिनी दीदीइइइइइ..... और इतना बोल कर ही वह बेहोश हो गई।।
अगले दिन हॉस्पिटल में उसकी आंख खुली और सब लोग उससे पूछ रहे थे कि क्या हुआ था तुम्हें कहां है बाकी लोग कहां गए थे तुम सब???
इतने सारे सवाल रजनी सब एक साथ सुन रही थी और कल जो हुआ उसके बारे में भी सोच रही थी....
वाह चीख चीख कर जो भी उसके दोस्तों के साथ हुआ सब बताना चाहती थी लेकिन उसकी आवाज नहीं निकल रही थी वह चाह कर भी किसी को कुछ नहीं बता सकती थी और ना ही कुछ बोल पा रही थी,,,, उसकी आवाज चली गई थी.....
कल उस तरह चिल्लाने के साथ ही उसकी आवाज भी उस चीखते वीरान किले के अंदर ही रह गई.... जहां से उसके दोस्त , उसकी बहनऔर उसकी आवाज कभी भी वापस नहीं आ सकते थे......
सिमरन

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