अच्छा है गुस्से से मुंह फेर लेना मेरा,
आएंगे सामने तो बात बढ़ेगी।

कुछ बुरा भला किसी को कहने से पहले
 जरा सोचों अंजुम क्या उसपे गुजरेगी।

जब वो तेरे नस्तर से चुभते अल्फाजों,
की नोक उसके कलेजे को चुभेगी।

उसके मन में दर्द का सागर  भरेगा 
बनके तड़प आँखों से अश्कों की धार गिरेगी।

 तीर तन्ज के चलाने से पहले काश सोचा होता,
यह आग तुम्हारी लगाई है उसमें वो मासूम जलेगी।

 बहुत है तुम्हारे चाहने वाले  तुम्हें क्या परवाह,
कभी गौर करना अपनी कमी तुमको भी लगेगी।
 
 बहुत बसे हैं तुम्हारी दिल की धड़कनों में,
कभी नाम उसका लेना धड़कन कुछ अलग ही कहेगी।


अंजू दीक्षित
बदायूँ,
उत्तर प्रदेश।