तुम मुझसे मिलने आ रहे हो न" मल्लिका की बेहद मीठी आवाज "भानु के दिल मे ,हलचल पैदा कर रही थी ।
मल्लिका मै"तुमसे मिलने किस बहाने से आऊँ "मै खुद तुम्हे देखे बिना ,एक एक पल कैसे बीता रहा हू मेरा दिल जानता है ।

मुझे नही पता "बस मुझे मिलना है"मल्लिका बोली"बच्चो सी जिद मत करो ,मे आने की कोशिश करुँगा "नही कोशिश नही "गर हप्ते भर मे नही  आऐ ,तो अब बात मत करना"बाय """""""""

और फोन कट "ये लडकी भी अजीब है,किसी दिन दास्तां बनावा देगी "पर है "बहुत प्यारी "सोचते हुऐ ,मस्कुराया भानु"

मल्लिका  बहुत खुश थी"सुबह से उसका मन उडा उडा था।
आज भानु आने वाला था। सिर्फ उससे मिलने"वो मन ही मन मस्कुराऐ जा रही थी !

कई बार फोन चेक कर चुकी थी"न मैसेज न कोई काॅल"
मल्लिका की बैचेनी बढती जा रही थी।उसका किसी भी काम मे मन नही लग रहा था।

आओ  "बेटा "पापा की आवाज उसके कानो मे गूँजी"
क्या भानु आ गया "मल्लिका ,की धडकनै बढ गई"
उसका मन  तो चाह रहा था ।कि वो दौडकर उसके  पास पहुँच जाऐ,उसके सँकोच ने उसे जाने न दिया।

आज कैसे  याद आ गई "बेटा" अँकल जी मै इधर से गुजर रहा , सोचा आपसे मिलता चलूँ ।
अच्छा किया बेटा जो मिलने आ गये।
और घर पर सब ठीक है """""जी अँकल"""
भानु की नजरे मल्लिका को तालाश रही थी।वो मन ही मन सोच रहा था।किस पागल लडकी से प्यार कर बैठा'पहले मिलने की जिद करती है,फिर जाने कहा छुप जाती है, 
भानु की बैचेनी बढ रही थी।
बेटा मल्लिका भानु आया है,उसके लिऐ चाय बना कर पिलाओ ,तब तक मै तुम्हारी माँ को मन्दिर से लेकर आता हूँ।
पापा के जाते ही मल्लिका चाय लेकर आ गई,आज वो बहुत खूबसूरत लग रही थी।भानु उसे अपलक देखे जा रहा था।
क्या हुआ जनाब ,देखे ही जाऐगे या,चाय भी पियेगे ,ठन्डी
हो जायेगी"मै चाय पीने नही आया' भानु बोला ,अच्छा जी'
फिर आप क्या करने आये"है।
मल्लिका, ने अपनी बाहे उसके गले मे डाल दी'तभी भट की आवाज के साथ बाहर का दरवाजा खुल गया।पापा सामने खडे 'गुस्से से दोनो को घूर रहे थे।
पापा पर नजर पडते ही दोनो एक दूसरे से अलग हो गये!
अब तक मोहल्ले के काफी लोग अन्दर आ गये थे।
सब की आँखो मे गुस्से का सैलाब था।
मल्लिका और भानु के मिलन मे सबसे ज्यादा विरोध मे समाज था।क्योकि दोनो की अलग अलग जाति थी।मल्लिका नीची जाति की थी और भानु कायस्थ ब्राम्हण परिवार का " 

मल्लिका के पिता  समाज मे सम्मानित व्यक्ति थे ,मल्लिका के पापा "अपने सम्मान  के लिऐ उसी रात खुद को समाप्त कर लिया।
जिस रात मल्लिका ने भानु के साथ भाग कर शादी की थी।
उसके बाद जातिवाद मे जाने कितनो के अशियाने जलाये गये ।
लोगो से छिपते छिपाते दोनो ने अपना छोटा सा अशियाना बना लिया । फिर कुछ दिनो बाद ही दोनो के बीच मे अहम् 
ने जन्म ले लिया"मल्लिका कही न कही खुद को दोषी मान रही थी।और अपनी माँ से मिलने चली गई,
भानु ने भी जातिवाद मे अपना बहुत कुछ खोया था।उसे मल्लिका से इसी बात की नाराजगी थी।
और दोनो की तकरार इस हद तक बढी की दोनो एक दूसरे से अलग हो गये!और बात तलाक तक आ पहुँची,
जिस दिन तलाक हुआ,उसके अगले दिन ही"रेल की पटरी पर एक क्षत विक्षत लाश पडी थी।वो भानु की थी।
जेसै ही मल्लिका को खबर मिली 'मल्लिका ने भी खुद का अँत कर लिया।
बाद मे  पुलिस छानबीन मे जो तथ्य उजागर हुऐ,वो चौका देने वाले थे।
मल्लिका भानु से पाँच साल बढी थी।और ससुराल वालो के ताने से परेशान थी।ऊपर से समाज वाले भानु को हर दिन परेशान करते थे।मल्लिका भानु से बहुत प्यार करती थी।भानु की खुशी के लिऐ ही उसने तलाक का निर्णय लिया था।
और भानु मल्लिका के बिना जी नही पाया,और खुद ही रास्ते से हट गया। 
""  मिल तो जाते है प्यार करने वाले,
"""पर दुनिया उन्हैं जीने नही देती"




           
                 रीमा महेन्द्र ठाकुर
             रानापुर, ‍झाबुआ, मध्यप्रदेश