तुम अपना फर्ज निभाओ हम अपना फर्ज निभाये।
तुम राम ढुढ कर लाओ हम सीता बन जाये !!परिलक्षित सीता के संग जब न्याय राम न कर पाये।
 तेरी औकात क्या मानव तू ये कलकँ मिटा पाये।। शापित है धरती मैय्या तेरा मन ढोने को ।
सबला बन बैठी अबला तेरा तन ढोने को।।
  नव माह गर्भ मे रहकर तूने जो जीवन पाया।  रणचंडी बन कर माँ ने  तेरा अधिकार  दिलाया।। तू उस अबला को डस कर उससे ही छल करता। हे एक अनजान आदमी तू खुद से क्यू छल करता।। 
थक हार कर वापस आयेगा तो मन तेरा घायल  होगा।  
माँ ममता से भर लेगी गीला आँचल  होगा।। 




                      
                                  ---रीमा ठाकुर