बिहार में लड़का सब के लिए बारहवीं या दसवीं के बाद पटना जाना उतना ही जरूरी होता है जितना कि नये-नवेले शादीशुदा जोड़े को शादी के बाद हनीमून पर जाना, अब का करें गाँव में आगे की पढाई-लिखाई के सुविधा की कमी के वजह से सबको पटना का रूख करना ही पड़ता है।
गाँव के हाईस्कूल से बारहवीं करने के बाद हम भी गये थे पटना कम्पटीसन इग्जाम सब के तैयार करने के लिए, आप पटना जायें और आपको लभलाइटिस का बिमारी ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता भले आप डेंगू-मलेरिया की बिमारी से एक बार को बच भी जायें लेकिन इ लभलाइटिस के बिमारी से बच पाना बहुत मुश्किल है और ये जो लभलाइटिस का बिमारी है न जी इ कैंसरो से ज्यादा खतरनाक होता है।
पटना में हम भी एक कोचिंग क्लास में एडमिशन ले लिये थे, शाम के 4 से 6:30 हमारी क्लास रहती थी, भले ही बड़े-बड़े शहरों में प्यार की शुरुआत फेसबुक या फिर किसी कैफे से शुरू होती होगी लेकिन ये पटना था यहाँ प्यार-मोहब्बत की शुरुआत कोचिंग के नोट्स के आदान-प्रदान से ही शुरू होती है...
कोचिंग जॉइन करे हमे भी लगभग पाँच महीना हो चुके थे तो हम भी कब तक लभलाइटिस बिमारी से बच पाते, आखिरकार हमे भी इस बिमारी ने अपना शिकार बना ही लिया।
वो काली आँखों वाली लड़की उसकी आँखें ऐसी जैसे कोई महंगी शराब हो उसकी आँखों को देखकर जैसे बिना पिये ही नशा चढ जाता था, खुद से बातें करते हुए चलती थी वो पटना की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर और हम बस दूर से उसको कनखियों से निहार कर शरमा जाते थे, वो ठहरी एकदम शहरी लड़की और हम गाँव के देहाती लड़के मिलन तो मुश्किल था हमारा लेकिन नामुकिन भी नहीं इसलिए एक बार ट्राय करना तो बनता था, हम कोचिंग में बैठकर उसको दूर से निहारते रहते और वो अपने कलम को मुंंह में दबाये बोर्ड पर देखती रहती, अभी तक हमारी हिम्मत नहीं हो पाई थी उसे अपने दिल की बात बताने के लिए एक दिन जैसे-तैसे अपने रूम पार्टनर को सब कुछ बताये वो हमको गरिया के हमारा कोन्फिडेंस बढा तो दिया लेकिन फट तो हमारी अब भी बहुत रही थी, एक दिन कोचिंग के छुट्टी में जब वो अपने हॉस्टल जा रही थी हमने उसको पीछे आवाज़ दिया "सुनिए कुछ काम था आपसे"
"जी कहिए" उसने पीछे मुड़ते हुए हमसे बोला।
हम तो बस उसको एकटक निहारते ही रह गये, "जी वो नोट्स चाहिए था आपसे, वो हमारी तबीयत कुछ दिनों से खराब थी इसलिए हम कोचिंग नहीं आ पाये" हम हकलाते हुए बोले।
"तो आपका कोई दोस्त नहीं है उससे ले लिजिए" वो हमसे फिर सवाल की।
"जी दोस्त तो हैं लेकिन उन सब की राइटिंग और बगुले के टांग में
कोई फर्क नहीं है" हम फिर उसको निहारते हुए बोले।
वो हमारी बातें सुनकर हँस पड़ी "ठीक है हम आपको अपनी कॉपी तो नहीं दे सकते लेकिन हम कल मोबाइल में फोटो खींच लायेंगे नोट्स की, आप फिर ले लिजियेगा" वो हमे फिर समझाते हुए बोली।
"एक काम करिये न आप हमे आपना वॉट्सऐप नंबर दे दीजिए, हम आपको उसी पर अपने नंबर से मैसेज कर देंगे आप हमें वहीं नोट्स के फोटो सेंड कर दीजिएगा" हम डरते हुए बोले।
"जी नहीं उसकी कोई जरूरत नहीं हम आपको कल शेयर कर देंगे" वो बोलकर वहाँ से चली गई।
अगले दिन फिर शाम को हम नोट्स लेने के बहाने उसी जगह पर पहुंच गये वो वहाँ खड़ी थी, उसने हमे मोबाइल से डायरेक्ट नोट्स के फोटो शेयर कर दिये और चुपचाप चली गई, हम भी शाँत रह गये कुछ नहीं बोल पाये।
कुछ दिन बीत जाने के बाद एक दिन, हमारा रूम पार्टनर हमारा कोन्फिडेंस फिर टाईट करके हमको भेजा इस बार हम ठान लिए थे अपने दिल की बात जरूर कह के रहेंगे, शनिवार का दिन था शाम को जैसे ही कोचिंग की छुट्टी हुई हम उसके हॉस्टल वाले रास्ते पर आकर खड़े हो गये जिससे वो अक्सर जाया करती थी वो हमे सामने से आते हुए दिखी उसको देखते ही पता नहीं क्यों हमारा दिल साला जनरेटर हो जाता था एकदम, हिम्मत करके हमने फिर उसे पीछे से आवाज़ दिया...
"सुनिए आप से कुछ कहना था" हम डरते-डरते बोल पड़े।
"अरे आप आज फिर, कहिए फिर नोट्स चाहिए क्या आपको" वो हमारी तरफ देखते हुए वोली।
"जी नहीं नोट्स नहीं चाहिए, वो हम कह रह थे कि हम आपसे फ्रेंडशिप करना चाहते हैं चाय पीने चलिएगा हमारे साथ" हमारी फट तो रही थी लेकिन फिर भी हम बोले जा रहे थे।
"पता था हमे आप जैसे लड़के होते ही ऐसे हैं पहले नोट्स माँगने का बहाना करते हैं फिर लड़कियों से बात करने की कोशिश करते हैं फिर धीरे-धीरे उनको पटाने की कोशिश करते हैं, देखिए दूर रहिए हमसे हमारा BF है ऑलरेडी, अब हमे परेशान मत करिये, गुड बाय" वो हमको मन भर सुना के और हमारे लभ पर दू कप गरम चाय उझूल के वहाँ से जा चुकी थी,
हम उसको जाते हुए देख रहे थे, अंधेरा अब पसर चुका था पटना शहर हमेशा की तरह लाइटों से नहाकर चमक रहा था।
समाप्त...
✍️ मंटू

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