दूर कही एक लय,
वन्देमातरम् की गूँज,
क्षितिज पर कही एक,
तिरंगा ,लहराता हुआ """"

धानी ओढनी,ओढे'
नवयौवन मे मुस्कुराती,
दुल्हन,,कभी न धुमिल,
वो ,आॅचल लहराता हुआ,,,,,

पगी हो जैसे ,फूलो की ,
पखुंडिया,उसके गुलाबी,
गालो पर, सकुचाकर रक्तभ"
चेहरा,मुस्कुराता हुआ""""

दूर हिमालय पर ,बर्फबारी मे,
उसका ,सपूत उसे चूमते हुऐ,
हर क्षण हर पल उसकी सुरक्षा"
मे शेर सा गुर्राता हुआ""""

कही दूर पगडंडियो के रास्ते,
पर ,नई नवैली ,एक दुल्हन "
बाट जोहती हुई,जन्मो का वादा,
नजर न आया,आता हुआ""""

एक बूढी माँ की पुकार दब गई,
ज्जबातो मे,जब वो बोली,
नही लाल मेरा ,जब पूरा सौपा"
तो कैसे ,ये आधा अधूरा हुआ""

चीत्कार ,कर उठी बहेना,
अब तो आजा ,सारे फर्ज"
पूरे किऐ ,एक मेरा भी कर दे,
बस छोडकर, न जा रोता हुआ,,,,

पिता की तन्द्रा जो टूटी ,
जब विक्षिप्त मन हुआ,
आह करके ,भूमि चूमी "
कुछ दिखा आता हुआ"

भाई ने गर्व से देखा"
उठ रही कुछ धूल थी"
नजर आया एक सिपाही"
तिरंगे मे ,लिपटा हुआ ,""

बेटे ने  मुखाग्नि दी ,हवन.
पंचतत्व को,दूर खडा देखता,
भावशून्य ,हो आकाश को"हे प्रभू,
जल्दी क्या थी ,कर्म न पूरा हुआ""""

फिर कभी भी जन्म लूँ,फिर यही ,
जन्मभूमि हो,फिर यही माँ बाप हो ,
फिर यही तकदीर हो,पुत्र ,पत्नी भाई'
बहेन,सबके कर्ज उतार लूँ ,फिर एक,
सिपाही ,रो पडा जाता हुआ""
      रीमा ठाकुर(लेखिका)
विशेष """""
मेरा उद्देश्य सिर्फ इस कविता मे इतना ही जताना है,
की भारत माँ का हर सिपाही,किसी का बेटा किसी का पति किसी का भाई पिता होता है "
बस हर सिपाही का दिल से सम्मान हो "
हमारी और देश की सुरक्षा के लिऐ ,
वो अपने फर्ज नही पूरे कर पाता,
हमारी कोशिश होनी चहिऐ उनके बाद ,हम उनके परिवार के प्रति कुछ दायित्व निभाये  जय हिन्द


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