चिड़ियों का अद्भुत होता जीवन संसार 
रंग रंगीले पंखों संग उड़ता पंख पसार 

तुम्हारा कलरव ही तो सुबह होने का एहसास कराता तुम्हारा चहकना ही तो मन में खुशियों के भाव लाता 

पर क्यों नहीं भाता जीवन स्वतंत्र, विच्छंद तुम्हारा उनको जाल बिछाकर बेबस करता वह शिकारी बहेलिया तुमको 

खोकर अपनी अभिव्यक्ति तुम कैसे जी लेते हो, सारा खुला आकाश तुम्हारा उस पिंजरे में कैसे बसर कर लेतेहो

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गौरैया प्यारी घर पर आकर 
दाना, पानी चुग आशीष बरसाती है ।।

बया जो बुनती तिनको से 
सपनों का घर अपने लिए अति सुंदर न्यारी है ।।

विजयदशमी के दिन नीलकंठ का दर्शन 
होता बड़ा ही मंगलमय, शुभकारी है  ।।

तोता ,मैना की जय सियाराम 
मानव जैसी अद्भुत बोली भी तुम बोल जाते हो ।।

बरखा रानी के आगमन पर ,खुशी 
जाहिर करने मनमोहक नृत्य मोर तुम ही तो दिखलाते हो ।।

प्रेम,शांति का दूत,संदेशवाहक 
कबूतर तुम ही तो कहलाते हो ।।

कोयल की मीठी मधुर स्वर, 
कोकिला तुम ही तो कहलाती हो ।।

स्वाति नक्षत्र की बारिश की प्रथम बूंदों से 
प्यास बुझाने वाले पंछी चातक तुम ही तो कहलाते हो ।।

गुण जो अनुपम पाया 
कर देते हो दूध से पानी अलग हंस वो तुम ही तो हो ।।   

निशाचर की रानी उल्लू ,बन 
श्री लक्ष्मी जी का वाहन समृद्धि की प्रतीक कहलाती हो ।।

पितृपक्ष पर सादर प्रणाम काकराज को 
भोजन कर पितरों का श्राद्ध कर्म पूर्ण कर जाते हो ।।

अपने शिकार को पलक झपकते ,लपकते 
ध्यान लगाने में माहिर बगुला जो कहलाते हो ।।

सफाई का दरोगा गिद्धराज तो 
बाज ,चील तुम ही तो जांबाज कहलाते हो ।।

किसानों की मददगार सहायक तुम ही हो 
भूमि को बेजान बनाने वाले जीवो को नष्ट कर देते हो ।।

चिड़ियों का अद्भुत होता जीवन संसार 
रंग रंगीले पंखों संग उड़ता पंख पसार ।। 

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              राजेश्वरी ठाकुर