किसी से भीड़ में कंधा भी टकराता है तो वह भी प्रारब्ध होते हैं। किसी जन्म का कुछ लेना देना होता है तभी इस जन्म में कोई हमारा दोस्त तो कोई दुश्मन होता है।
तो जन्म जन्म के साथ वाली एक कहानी हम आपको सुनाते हैं
मानव जो संगीत प्रेमी था और उसने अपने शोक कोई अपना काम बनाया।
अभी तक तो वह ऑफिस में ही काम करता था पर उसके संगीत के जुनून उसकी समझ बूझ और निर्णय लेने की क्षमता को देखते हुए पहली बार कंपनी ने बडी जिम्मेदारियों उसे सौंपी। बेंगलुरु में संगीत का एक का लाइव कंसर्ट करवाना था।
हारमोनियम, तबला इत्यादि तो मानव की बजा लेता और गा भी लेता किंतु दूसरे उसे 1 साथी की तलाश थी महिला सिंगर कीः
मानव चाहता था कि कोई ऐसी लड़की या महिला उसे मिले हैं जो यही की हो ताकि वह इधर के संगीत को समझ सके और लोगों के साथ जुड़ सके।
उसे तलाश थी एक पवित्र शुद्ध आत्मा की जो संगीत को जीना जानती हो, संगीत जिसकी रग-रग में बसा हो।
कई जानकारों ने नाम भेजें सब से मुलाकात हुई पर अभी तक कोई जची नहीं थी।
धीरे धीरे संगीत के प्रोग्राम का समय नजदीक आ रहा था पिछले 1 महीने से वह तलाश कर रहा था और अभी एक महीना बचा था।
मानव बुरी तरह हताश हो चुका था वह सोचने लगा कि फिर रिहर्सल के लिए समय कब मिलेगा।
मानव सरस्वती मां का उपासक था और एक दिन उसने सोचा कि यहां पास में एक सरस्वती मां का बड़ा मंदिर है वहां चला जाता हूंँ प्रार्थना करता हूंँ क्या पता मां मेरी सुन लेः
मन में एक उम्मीद भी जागी क्या पता उस गांव में जब जहां सरस्वती का मंदिर है वही मेरी तलाश पूर्ण हो जाए।
इसी विश्वास के साथ में मंदिर में बैठा था।
पुजारी ने उसे ऐसे बैठे हुए देखा और कहा कि आप यहां के नहीं लगते हो कहां से आए हो?
तभी मंदिर से आरती गाने की आवाज आई जिसका स्वर बहुत सधा हुआ था आवाज बहुत मीठी।
आवाज को सुन के मानव को लगाकर पूरे जहान में और कोई नहीं है वह है और आवाज हैः
ख्यालों में खोया रहा और पुजारी ने उसे फिर से पूछना शुरू किया जब तक आवाज भी बंद हो चुकी थी।
मानव ने कहा मैं अपने बारे में सब बताऊंगा। पहले बताइए कौन गा रही थी। जिस आवाज की तो मुझे तलाश थी
पुजारी ने कहा रे वह ,वह तो रिधिमा बिटिया है
यही अपने संगीत के मास्टर जी हैं उनकी बेटी है
मानव ने कहा महाराज मेरी सिफारिश कर दीजिए मुझे उनका पता दे दीजिए एक संगीत के प्रोग्राम में मुझे यही आवाज चाहिए।
पुजारी जी ने कहा बेटा वैसे तो रिधिमा घर पर सिखाती है लड़कियों को गाना, उसके पिताजी पुराने ख्यालों के हैं
और उसकी बुआ जी है घर पर तीन लोगों का परिवार है।
फिर भी तुम मेरा नाम ले देना और जाओ एक बार पूछ आओ।
जब मानव मास्टर जी के घर पहुंचा गांव में तो एक पुराना सा छोटा सा मकान उसने देखा।
छोटे से आंगन में कपड़े सूख रहे थे गीले गीले जो टपक रहे थे मानो अभी धोकर किसी ने टांगे हो।
एक तरफ रसोई में कुछ अच्छा पक रहा था उसकी खुशबू ऊपर से सुबह से खाली पेट मानव को और ज्यादा भूख का एहसास दिला रही थी।
धूपबत्ती की सौगंध और गाने की आवाज आ रही थी।
जैसे जैसे वह इस मकान में अंदर जा रहा था उसे ऐसा लग रहा था कि कोई पवित्र मंदिर है इसमें बहुत ही सकारात्मक ऊर्जा है।
दरवाजा तो खुला था फिर भी मानव ने अंदर जाने से पहले दरवाजे को खटखटाया।
एक छोटी बच्ची भागकर देखने आई कौन हैं आप किससे मिलना है?
मुझे मास्टर जी से मिलना है:
अंदर से एक महिला आई और समझ गया कि यह रिधिमा की बुआ होगी
नमस्ते कि उसने बताया मास्टर जी से मिलने आया है उसे अंदर ले गई एक कुर्सी खींचकर बिठाया और कहने लगी बुलाती हूंँ भाई को
तभी रिधिमा आई देखकर ठिठक सी गई,
ना जाने क्यों मानव के चेहरे को देख कर उसे एकदम शर्मा गई,नजर नहीं मिला पा ही थी,मानो शरम ने पलकों को इतना भारी कर दिया हो कि नाजुक आंखों से भार सहा ना जा रहा हो। उसे अपना सा लगा एकदम जानापहचाना ।
यूं ही मानव रिधिमा को एकटक देखे जा रहा था । जैसे उसने पहले भी कहीं उसे को देखा हो, वह कुछ ही सेकंड ऐसे लगे जैसे जन्मों से एक दूसरे को जानते हैं। जैसे खाली मैदान में बस मानव और रिद्धिमा ही हैं, दुनिया में और कोई नहीं।
तभी पीछे से मास्टरजी की आवाज कौन है भाई कौन मिलने आया है?
रिधिमा चुपचाप निकल गई और बच्चों को गाना सिखाने लगी।
मानव ने मास्टर जी के पैर छुए।
और अपने बारे में बताया घर परिवार नौकरी किस लिए वह बेंगलुरु आया और आज इस गांव में किसकी तलाश में आया
फिर उसने कहा मां सरस्वती की कृपा समझो कि मैंने वहां एक आवाज सुनी पवित्र आवाज जिसकी मैं तलाश में था पूछने पर पुजारी जी ने बताया कि मैं आपकी बेटी गा रही थी मैं उससे मंदिर में तो नहीं मिल सका तो आपके घर पर आया हूंँ पुजारी जी ने भेजा है।
आप इस प्रोग्राम में अगर इजाजत दें तो मैं आपके बेटी के साथ लाइव प्रोग्राम करना चाहता हूंँ, बहुत जरूरी है मेरे पास समय नहीं है और इससे अच्छी और बेहतर आवाज मुझे नहीं मिल सकती यही है जिसे मैं ढूंढ रहा था। मानव ने बहुत ही सरलता से अपनी बात रखी।
यूं मास्टर जी बहुत कड़क मिजाज के थे लेकिन उनके अनुभवी आंखों ने मानव के अंदर बैठे एक सच्चे इंसान को भी पहचान लिया था और उसने कहा ठीक है लेकिन अभ्यास के लिए तुम्हें यहां आना होगा। मेरी बेटी को कहीं नहीं भेजूंगा।
जी आप कंपनी का घर बेंगलुरु में है वह दूर पड़ेगा आप आसपास कहीं मेरा रहने का इंतजाम कर दे।
मास्टर जी ने कहा उसकी तुम चिंता मत करो ऊपर का कमरा मैं खाली करवा दूंगा तुम्हारे लिए और एक महीना तुम यही अभ्यास करना और रिद्धिमा तुम्हारे साथ गाएगी।
न जाने क्यों मैंने तुम पर भरोसा करके यह सब कह दिया है पर मेरा विश्वास मत तोड़ना।
मानव ने पैर पकड़ लिए नहीं गुरु जी बिल्कुल।
और मानव अपना सामान लेकर 1 महीने के लिए रिद्धिमा के घर आया दोनों साथ-साथ अभ्यास करते और ठीक 1 महीने बाद जब कंपनी का प्रोग्राम हुआ बहुत ही सफलता उन्हें प्राप्त हुई काफी नाम हुआ।
अगले प्रोग्राम के लिए भी मां सरस्वती की कृपा से रिधिमा और मानव की बुकिंग भी हो गई।
रिधिमा और मानव को तो मानो ऐसा लग रहा था पहले दिन से ही जैसे उनका जन्म जन्म का साथ है।
शरीर भले अब मिले हो लेकिन आत्माएं बहुत पहले से एक-दूसरे को जानते थी।
मगर मास्टर जी से किए वादे के अनुसार मानव कुछ कह नहीं पा रहा था अपनी भावनाएं छुपा रहा था उधर रिधिमा भी डरती थी कहीं पिताजी को भनक लग गई तो उन्हें लगेगा कि हमने उनका विश्वास तोड़ दिया।
पर इन दोनों की बेचैनी , सच्चा प्यार बुआ जी समझती थी उन्होंने एक दिन चुपके से मास्टर जी से इन दोनों के बारे में बात की।
पर मानव बहुत बेचैन था क्योंकि अब सारे कांटेक्ट खत्म हो चुके थे उसे तो वापस जाना ही था कर्नाटक के बाद अब अगला कांसेप्ट उसका तो गुजरात में था।
उसे लग रहा था कि वह रिद्धिमा को हमेशा के लिए खो देगा।
जाने से 1 दिन पहले वह पूरे परिवार से मिलने आया और उसने मास्टर जी को कहा पता नहीं क्या रिश्ता था मेरा आपके परिवार के साथ बिना जान पहचान के इतने अच्छे 1 साल हमने साथ समय बिताया मैं यह दिन कभी नहीं भूलूंगा।
अरे ! मास्टर जी ने कहा कि भूलना भी मत हम भूल ही नहीं देंगे। इसीलिए तो मैं कुछ देना चाहता हूंँ। तुम भी हमारे लिए इतने सारे तोहफ़े लाए हो। आज से मेरी बेटी की सारे जिम्मेवारी तुम्हारी।
मानव रिद्धिमा को लग रहा था जैसे उनका जन्मों का साथ इस जन्म में भी सफल हुआ।
वंदना शर्मा

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