नारी तू मन में प्रण कर ले, हर कठिनाई से रण कर ले।
न कोई तेरा अपना है, न कोई तेरा साथी है।
माना पथ में कुछ बाधा है,अस्तित्व तेरा कुछ आधा है।
अपना अस्तित्व बनाने को, हर बाधा से दमखम कर ले।
नारी तू मन में प्रण कर ले, हर कठिनाई से रण कर ले।
जग को तुझसे अपेक्षा है, पर तेरी भी कुछ इच्छा है।
बंधन समाज के अकड़े हैं, पैरों में बेड़ी जकड़े हैं।
हर बेड़ी तोड़ निकलने को,इन पैरों में तू बल कर ले।
नारी तू मन में प्रण कर ले,हर कठिनाई से रण कर ले।
पथ में रंगीले मेले हैं, नैनों को बड़े सजीले हैं।
मेलों में नहीं भटकना है, तेरा एक निश्चित सपना है।
हर सपना पूरा करने को, अपना तन मन अर्पण कर ले।
नारी तू मन में प्रण कर ले, हर कठिनाई से रण कर ले।
माना आशा कुछ धूमिल है,कुछ लक्ष्य दृष्टि से ओझल है।
झंझावातों सी आंधी है , संघर्ष तेरा भी जारी है।
संघर्ष न तेरा थक पाए, इतना मन को संबल कर ले।
नारी तू मन में प्रण कर ले,हर कठिनाई से रण कर ले।
ये ह्रदय तेरा अति कोमल है,कुछ मन भावों से बोझिल है।
दुर्बलता तेरी करुणा है, अब इसको शक्ति बनाना है।
भावों के अश्रु पराजित कर,इस हृदय को कुछ पत्थर कर ले।
नारी तू मन में प्रण कर ले, हर कठिनाई से रण कर ले।
निर्भीक पगों से बढ़ना है, जीवन संघर्ष न थमना है।
ईश्वर की देन निराली है, तू गौरी दुर्गा काली है ।
हर रूप में तत्पर आने को, अपना निश्चय तू दृढ़ कर ले।
नारी तू मन में प्रण कर ले, हर कठिनाई से रण कर ले।
वो सुबह एक दिन आनी है, जब तेरी सफल कहानी है।
हर दृष्टि में आदर होना है,बस तुझको धैर्य न खोना है।
अब धैर्य तेरा न डगमग हो, इतना मन को स्थिर कर ले।
नारी तू मन में प्रण कर ले, हर कठिनाई से रण कर ले।
हर कठिनाई से रण कर ले । .........
संपूर्ण नारी जाति को समर्पित 🙏🙏🙏🙏🇮🇳🕊️
....✍️🙏🌅 ऋतु बाजपेई

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