पानी सीधा साधा सा
जिसमे मिला दो
बेचारा सा ।
रंगो मे रंग जाये ये
मधुशाला भी जाये ये
अपना रंग भुलाये ये
कही बहे झर झर झरने मे
कही नदियो मे लोरे ये
मीठा मीठा रसपान करा दे ।
भूखे का भोजन बन जाये
रोटी सा स्वाद दिलाये
मीठी नींद सुला दे ये ।
पानी सीधा साधा सा
जिसमे मिला दो
बेचारा सा ।
गंगाजल बन कर आये तो
माथे पर चढ जाये ये
नवाँ शीश चरणोदक लेते
श्रद्धा से भर जाये ये ।
जल ही जीवन होता है
सब कुछ तो इससे होता है
अन्न उपज हो या जीवन
पानी बिन सब सून लगे रे
पानी सीधा साधा सा
जिसमे मिला दो
बेचारा सा ।
मीनाक्षी शर्मा

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