अश्रु की धारा आंखों से बह कर--
जब मन हल्का कर जाती है,
खुशी के हो या गम के आंसू---
आंखों में अकस्मात आ ही जाते--
हैं,
और छा जाती है प्यारी सी मुस्कान अधरों पर---
और आंखों में लिए अश्रु की एक- धारा के साथ,
अंतर्मन की खुशी का परिचय देते- हैं ये अश्रुओ की धारा, एक सुहाने एहसास के साथ,
खुशियों के आंसुओं की छटा--- होठों पर निराली होती है,
जैसे किसी शायर की गजल की-- धुन मतवाली होती है,
आंसुओं की भी एक अजब सी--- कहानी होती है,
हो गम के अगर आंसू तो चेहरे पर एक छवि विरानी होती,
इन दो नैनों में कभी खुशी कभी-- गमगीन अनुभव की---
क्षमता की बेइंतहा मेहरबानी होती है,
हां आंसुओं की भी एक कहानी होती है,
संगीता वर्मा ✍✍

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