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सुकून भरी नींद,तज कर, 
माँ मैं परदेश जा रहा हूँ! 
मिट्टी की सोंधी खुशबू, 
मटके का पानी, 
तेरे हाथों की मीठी, 
रोटी तज कर, 
माँ मैं परदेश जा रहा हूँ! 

कहना चाहता है ये दिल, 
माँ, रोक ले ना मुझे पर....., 
बीमार पिता और घर में, 
छोटी बहन देख कर, 
माँ मैं परदेश जा रहा हूँ!


माँ, परदेश जाकर भी, 
जीता हूँ अपने देश, 
को दिल ही दिल में! 
दिन तो कट जाता है, 
रातें कटती नहीं पल छिन में! 
गाँव की मस्ती, पापा की याद, 
तेरे हाथों की थपकी, 
बहनों का प्यार, 
प्रेमिका की मोहब्बत को, 
दिल ही दिल में जिये, 
जा रहा हूँ, 
माँ मैं परदेश जा रहा हूँ! 


बैठ तांगे में, चला घर से दूर, 
पलट पलट कर दिल के, 
जख्म, सीये जा रहा हूँ! 
माँ मैं परदेश जा रहा हूँ! 


दूर कहीं से आ रही आवाज, 
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा, 
गाँव मेरा मुझे याद आता रहा! 
इस गीत में खुद को, 
लिये जा रहा हूँ! 
माँ मैं परदेश जा रहा हूँ! 
माँ मैं परदेश जा रहा हूँ! 
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श्वेता कर्ण! 
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