संक्षिप्त में विस्तृत है जो,
शौर्य के साहस है जो,
कलम में तलवार है जो,
सर्वश्रेष्ठ गुरु है जो,
ज्योति की किरण है जो,
मीनाक्षी में सरस्वती है जो,
रचना में आदत है जो,
नीरस में रस है जो,
नीरव में रव है जो,
हृदय के भाव है जो,
स्नेह के अपार है जो,
काव्य के आधार है जो,
अलंकार में श्रृंगार है जो,
गलती के सुधार है जो,
संयत के उपमा है जो,
मर्यादा का सार है जो,
करुणा के सागर है जो,
रजनी में प्रभाकर है जो,
शशि से शीतल है जो,
सुमन के सौरभ है जो,
रत्नों में नीलम है जो,
सुनंदा के भावन है जो,
शैल को पिघलाती है जो,
दर्शन में साक्षात् है जो,
🙏🙏🙏🙏🙏
उन पावन रचनाओं को
सहृदय अभिनन्दन करते हैं।
वीरों को साहस देते हैं।
श्रृंगार में संयत रखते हैं।
करुण में भाव रचते हैं।
हास्य मन से हसंते हैं।
सतेश देव पाण्डेय

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