अम्बर की छूती पंतग सी ,
हौसलो की मीठी उडान सी 
उत्साहित होकर जीवन की 
बात ही कुछ और होती है ।

समस्या मे समाधान ढूढने की
अटल होकर निर्णय लेने की 
सब की सुन कर मन की करने की 
बात ही कुछ और होती है ।

कठिनाइयों मे अधम साहस की
परिस्थितियों को सभाँल लेने की
हर डर से टकरा जाने की जिद की
बात ही कुछ और होती है ..।

नारी हूँ ,फिर भी सब पर भारी हूँ 
अबला रूप को न स्वीकार करने की
अपनी धुन  की मनमर्जियां करने की 
बात ही कुछ और होती है ...

आत्मनिर्भर होकर जीवन जीने की
अपना आत्मबल सर्वोपरि रखने की 
गलत निर्णयो को नही मानने की जिद
बिचारी से वीरांगना बन कर रहने की 
सचमुच,बात ही कुछ और होती है ।





            मीनाक्षी शर्मा
        भोपाल मध्यप्रदेश