ममता छोटे से गांव में रहती हैं, और गांव के पास एक कस्बा है एक-दो बार के सिवा हो कहीं बाहर नहीं निकली है। जैसा कि दूर-दराज के गांव में सभी का एक सपना होता है दिल्ली घूमना। ममता के मन में भी है सपना बचपन से पल रहा था उसने बस सुन रखा था अपनी मां के मुंह से कि दिल्ली में चिड़ियाघर है, दिल्ली में लोटस टेंपल है। फिर उसके बाद उसने किताबों में पढ़ा दिल्ली में संसद भवन है, राष्ट्रीय भवन है, राष्ट्रीय भवन में मुगल गार्डन है और जैसे - जैसे वह बड़ी होती गई दिल्ली की एक एक चीज उसकी आंखों में बस्ती चली गई। मैं दिल्ली गई तो कभी नहीं पर किताबें पढ़कर  इतनी जानकारी  ली थी शायद कोई दिल्ली वाला भी ना बता सके कि कौन सा स्मारक क्यों प्रसिद्ध है? किसके पीछे की क्या कहानी है?
दिल्ली ममता की पसंदीदा है लेकिन लोटस टेंपल देखने का उसे बहुत चाव था। वह अक्सर सोचा करती थी कि एक कमल के फूल पर बना है या हम कमल के फूल के अंदर जाएंगे।

देखते देखते हैं 12वीं कक्षा में आ गई अच्छी बात यह थी कि इस साल 12वीं कक्षा के सिविल साइंस के बच्चों को संसद भवन ले जा रहे थे स्कूल की तरफ से। ममता का बहुत मन था तो उसने अपने मम्मी - पापा को बताया के यहां जाना बहुत जरूरी है और ज्यादा पैसे भी नहीं लग रहे हैं सो ₹100 में ही स्कूल वाले लेकर जा रहे हैं सुबह जाना है शाम को वापस तो पढ़ाई के लिए जरूरी है जाना इतना सुनते ही पापा ने हां बोल दिया फिर मम्मी भी कुछ नहीं बोली।

ममता को समझ ही नहीं आ रहा था कि वह क्या पहने और कितने सालों का सपना पूरा होने वाला था। उसने मम्मी से जिद की कि मुझे एक मेरी पसंद का सूट दिलवा दें और बहुत ही हल्के रंग का धरती जैसा रंग उसने अपने लिए चुना जिसे पहनकर पता ही नहीं चल रहा था कि ममता का रंग है उस कपड़े का रंग है दोनों एक दूसरे में घुल मिल गए थे।
आंखों में उसकी सारी रात कटी दिल्ली की धरती पर पहला कदम रखने जा रही थी।
पर यहां ममता कहां जानती थी कि दिल्ली जाकर उसे एक दूसरी दुनिया देखने को मिलेगी।
तय समय पर अगले दिन बस में सभी लड़कियां बैठी ममता का स्कूल लड़कियों का स्कूल था। तब अपनी सहेलियों के साथ वो सबसे आगे वाली सीट पर बैठी। उनमें से एक कैमरा लेकर आई थी और वह बहुत सारे आगे की प्लान बनाने लगी, कैसे फोटो खींचना है? कौन किसके साथ पहले की खिंचवेगी, बस में अंताक्षरी का दौर चला, गाने गाए गए ,थोड़ा बहुत डांस किया गया फिर डांट कर सभी टीचर्स इन लोगों को बिठा दिया।

बस जाकर सीधा पार्लियामेंट में रुकी संसद भवन मंदिर जाने के लिए जितने भी कानून थे चेकिंग, आई कार्ड दिखाना उनकी फोटो खींचना वह सब चकाचौंध आंखों से ममता और सारी लड़कियां देख रही थी। 1 घंटे बाद वे सभी संसद भवन से निकले।
अब काफी समय बचा था तो सोचा जाने अब कहां जाए जाए। टीचर किसी एक जगह का नाम लेती तो लड़कियां दूसरी जगह का थोड़ी देर तो समय यूं ही चला गया लेकिन ममता और उसके सहेलियां बार-बार लोटस टेंपल का नाम ले रही थी।
फिर समय को देखते हुए उनकी क्लास टीचर ने कहा की  हम आपको मुगल गार्डन दिखाएंगे और लोटस टेंपल और कुतुब मीनार दिखाइए उसके बाद घर चलेंगे।
सारी लड़कियां जोर से चीखी खुशी से।
पहली मंजिल तक पहुंची मुगल गार्डन भी बंद था।
सब में निराशा दौड़ गई और ममता भी सोचने लगी कहीं मुगल गार्डन की तरह लोटस टेंपल भी बंद हुआ तो फिर उसने ध्यान दिया कि नहीं आज सोमवार है आज कैसे बंद होगा।
फिर दोपहर का खाना खाने के बाद बस चली दोबारा से काफी लंबा घूम कर पूरी दिल्ली  कितने सारे कॉलेज, बड़ी- बड़ी बिल्डिंग है न जाने क्या क्या सब कुछ नए सपने जैसा दिख रहा है ।टीवी में देखती थी उससे भी सुंदर दिल्ली  लग रही थी।
जब कुतुब मीनार पहुंची तो वहां उन्होंने कुछ फोटो खिंचवाई घूमे फिर एक और बार - बार ममता याद दिला रही थी टीचर को के चलिए ना लोटस टेंपल जल्दी से चला जाए कहीं शाम हो जाए बंद हो जाए।
अब बस चल पड़ी थी लोटस टेंपल की तरफ परंतु 1 जगह  बस को रोक दिया गया वहां पर बस में थोड़ी कुछ खराबी आ गई और फिर सभी  चाय भी पीना चाहती थी।
ममता बहुत उदास थी उसने अध्यापिका से पूछा कि कितनी दूर है उसने कहा जो पार्क जिसमें हम रुके हैं, बस  थोड़ी ही दूर है लोटस टेंपल तुम्हें जरूर दिखाएंगे तुम चिंता मत करो।

वो पार्क  बहुत बड़ा था लड़कियों ने तो कभी इतने बड़े पार्क  ही नहीं देखे थे सभी इधर-उधर फैल गई फोटो खींचने लगी मस्ती में आ गई। आसपास के लोग जो रोज आने वाले थे वह सब इन्हें देख रहे थे।
उस पार्क में स्केटिंग करने के लिए जो जगह थी उसके चारों तरफ फाउंटेन चल रहा था, ममता और उसके दोनों सहेलियां उधर की तरफ चल पड़ी।
एक जगह ममता ने देखा उसकी कुछ जान पहचान की लड़कियां ग्रुप बनाकर खड़ी हैं उसे कुछ समझ नहीं आया वह भी पास में गी  तो देखा एक बेंच पर दो-तीन लड़के बैठे हैं और यह सारी इनसे बात कर रही है।
खुश थे और आपस में बातें कर रहे तो ममता को यह सब ठीक नहीं लगा उसके तो मन में लोटस टेंपल बसा हुआ था और वहां से चली और अकेले ही टहलने लगी।
कुछ लड़के स्केटिंग कर रहे थे और दो लड़के खड़े थे उनमें से एक लड़का ममता के पास आकर कहने लगा आपको पहले तो कभी नहीं देखा इस पार्क में कहां रहते हैं?

ममता ने दाएं बाएं देखा उसे लगा कि हां पूछ तो मुझे से ही रहा है।
ममता ने थोड़े डरी हुई आवाज में कहा  हम यहां घूमने आए।

वह लड़का जोर से   हंसा  तुम यहां घूमने आई हो? सीरियसली इस पार्क में
उसके साथ उसका दोस्त भी जोर जोर से हंसने लगा साथ ही  जो स्केटिंग कर रहे थे वह दोनों भी रुक गए और सब हंसकर ममता की तरह देख रहे थे।
ममता बहुत ज्यादा शर्म आ रही थी डर रही तो उसको समझ नहीं आ रहा था क्या कहें तभी पीछे से उसको अपनी सहेली आती दिखाई दी  वह मुड़ कर उनकी तरफ भागने लगी।
अचानक किसी ने उसका हाथ पकड़कर उसे थाम लिया ममता की धड़कन तेज हो गई वह मन में सोचने लगी कि भगवान जैसा मैं सोच रही हूँ ऐसा ना हो, यह हाथ  लड़के ने ना पकड़ा हो, 
मुड़कर देखा तो उस लड़के ने बड़े प्यार से ममता का हाथ पकड़ा हुआ था कहने लगा
क्षमा कीजिए अगर आपको बुरा लगा हो तो लेकिन यह तो एक सामान्य सा पार्क है घूमना है तो लोटस टेंपल चले जाइए पास में ही है।
ममता ने एकदम से अपना हाथ छुड़वाते हुए का हां हां वही जा रहे हैं चाय पीने के लिए हमारी बस रुकी है। ममता उस लड़के से नजर नहीं मिला पा रही थी उसे वह घर में भाग गया था उसकी धड़कन तेज हो रही थी
ममता जाने लगी तो वह लड़कों का ग्रुप  पीछे-पीछे है  चला सामने से और भी सभी लड़कियों को देखकर सब एक दूसरे को हाय हेलो कहने लगी लेकिन ममता चुपचाप खड़ी थी कुछ  नंबर भी एक्सचेंज की।

ममता के बिल्कुल करीब आकर उस लड़के ने कहा मेरा नाम दीपक है और मैं लॉ का स्टूडेंट हूंँ, यह मेरा नंबर है आप मुझे बहुत अच्छी लगी, मुझसे दोस्ती करेंगी?
ममता  शर्मा बहुत गई और हल्के से मुस्कुरा दी।
उसकी फ्रेंड ने लड़के के हाथ से कागज का टुकड़ा लिया और कहा यह नहीं तो हम कर लेंगे फोन और सारी लड़कियां हंसने लगी इस बार दीपक थोड़ा झिझक गया।
सभी को बुलाने के लिए आवाज लगाई जा रही थी सभी लड़कियां उधर भागने लगी दीपक ने ममता का हाथ पकड़ा और  किस करते हुए कहा फोन का इंतजार कर लूंगा, कुछ सेकंड में ही उसने सब किया ममता भागते हुए कह पाई ना सोच पाई।
सब लड़कों का समूह अपनी  बाइक पर बस के पीछे लोटस टेंपल पहुंच गया और वहां कई देर तक उनमें नैन मटक्का  चला,  अध्यापिका को भी ना पता चले और वे एक दूसरे को देख कर मुस्कुराते रहें।  वहां एक दूसरे से अनजान बने हुए दोनों ने पानी में सिक्के भी डालें और दोनों के मन में एक प्रार्थना थी।
यहां लोटस टेंपल में ममता और दीपक का प्रेम शुरू हो गया था थोड़ी देर बाद वह सारे वापस चले गए क्योंकि  अध्यापिका को शक हो गया था सारे लड़के लड़कियों का पीछा करते यहां तक आए हैं और उन लोगों ने इन सभी लड़कों को डांट दिया था।
पहला एहसास था ममता के लिए। लोटस टेंपल में चली तो गई लेकिन अब उसको वह बचपन वाली एक्साइटमेंट नहीं  रही थी शांति ज्यादा महसूस हो रही थी। खूबसूरत निहार रही थी और उसके मन में बस दीपक बसा था। शायद यही प्रार्थना उसके मन से निकल रही थी कि काश मैं दीपक से फिर कभी मिल पाऊं।
जाते वक्त ममता जितनी रोमांचित व उतावली थी, आते हुए उतनी  ही शांत और गंभीर थी और बस मुस्कुरा ही जा रही थी बिना किसी वजह। वहीं दूसरी तरफ दीपक से बिछड़ने का दर्द भी दिल में अनुभव हो रहा था।
स्कूल में वापस आकर कोई ऐसा दिन नहीं गया जब  सहेलियां और वे उन लड़कों की बातें ना करती हो और ममता कभी दीपक को मिस ना करती हो।
ममता की सहेली 1 दिनों से जबरदस्ती एसटीडी पर ले गई और उसने बताया कि मैं दीपक से एक दो बार बात कर चुकी हूंँ। लेकिन वह हर बार तेरे बारे में पूछता है चल तेरी बात कराती हूंँ।  ममता के घर पर फोन नहीं था।
ममता ना ना कह रही थी पर उसका दिल जोर से धड़क रहा था और उसने पहली बार दीपक से बात की उसके बाद तो कोई शब्द नहीं है बोलने के लिए, पर वह उधर से भोले की जा रहा था बहुत रोमांचित हो रहा था, दीपक ने कहा  मैं एक सेकेंड के लिए भी तुम्हें भूल नहीं पाया।
फिर कब मिलोगी? यार तुम से बात करने के लिए मैं दो-तीन बार तुम्हारी फ्रेंड से बात कर चुका हूंँ वह हर बार वादा करती थी कि तुमसे बात कराएगी। फिर दोबारा बात करने का वादा कर ममता नहीं फोन रख दिया।
समय यूं पंख लगा कर उड़ा और देखते-देखते 12वीं की परीक्षा नजदीक आ गई सभी जी तोड़ मेहनत कर रही थी अच्छा रिजल्ट आया। अब ममता का सपना था कि वह दिल्ली जाकर पढ़े। उसको बस एक यही रास्ता दिखाई दे रहा था दीपक से दोबारा मिलने के लिए।
इस बीच ममता ने दो बार  दीपक से बात की थी।
ममता का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, मम्मी पापा से सवाल पूछने के लिए कि वह आगे की पढ़ाई दिल्ली में रहकर करना चाहती है, हॉस्टल में रहेगी।
99% तो उसे पता था जिस तरह कि उसकी फैमिली है वह लोग मानेंगे नहीं पर फिर भी 1% उसे यकीन था कि शायद उसके सपने पूरे हो जाए सपनों का शहर दिल्ली, उसमें सपनों का राजकुमार दीपक और क्या चाहिए।
लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है जो सपने देखे जाए वह पूरे हो। कहां वह दिल्ली रहकर आगे  पढ़ने की सोच रही थी और अचानक से उसे खबर मिली कि उसकी शादी पक्की हो गई है इस महीने शादी है। ममता पर तू जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
ममता ने घरवालों को बहुत समझाया कि उसके इतने अच्छे नंबर आए हैं, उसको इतने अच्छे कॉलेज में दाखिला मिल रहा है, उसे पत्रकार बनना है, आप सब मान जाइए।

घरवालों ने कहा इतना पढ़ा लिखा कर क्या करेंगे फिर  लड़का ढूंढना भी मुश्किल हो जाएगा।
ममता  शादी नहीं करना चाहती थी पर घरवाले जबरदस्ती उनकी शादी करना चाहते थे। अब उसके पास कोई रास्ता नहीं था। एक दिन उसने अपनी सहेली को चुपके से  बताइए और उसकी सहेली ने दीपक को।
दीपक ने कहा तुम कैसे भी करके मुझे उससे एक बार मिलवा दो या बात करा दो मैं सब समझा दूंगा।
दीपक ने ममता को बहुत हौसला दिया और समझाया कि  तुम्हारा हक है तुम आगे बढ़ो, पढ़ो शादी के लिए कोई कारण ऐसा तो है नहीं तुम्हारे मां-बाप के पास।
ममता बस रोए जा रही थी दीपक ने कहा डरो मत मैं तुम्हारे साथ हूंँ, ममता ने पूछा कब तक? दीपक ने बिना कुछ सोचे कहा जीवन भर तक।
ममता रोते हुए न जाने कैसे सांस में कह दिया तो आ जाओ मुझे ले चलो तुम ही मेरे सपने पूरे कर सकते हो मुझे पढ़ा सकते हो।
दीपक ने अपने घर में कहा तो सबसे पहले जात पात को लेकर बवाल मच गया कि लड़का लव मैरिज करना चाहता है वह भी इस उमर में, पहले कुछ कमाने तो लग जाओ।
लेकिन दीपक के चाचा जी उन्होंने दीपक का साथ दिया और वह सब ममता के घर आए। उन्होंने ममता के घर वालों को समझाया लेकिन वह मानने को तैयार नहीं थे कि गांव में यह बहुत बड़ी बात है कि हम अपनी जात से बाहर लड़की की शादी कर रही हैं यह हम से नहीं होगा।
किंतु दीपक के चाचा ने बहुत ही समझदारी से काम लिया उन लोगों को पहले प्यार से समझाया की लड़की के भविष्य का सवाल है, वह पढ़ने में अच्छी है, उसके सारे सपने पूरे करना आप माता-पिता का कर्तव्य है और फिर उनको कानूनी रूप से भी समझाया कि अगर यह चाहे दोनों बालिक हो चुके हैं 18 साल से ऊपर तो अपनी मर्जी से सब कर सकते हैं कल को भाग जाएंगे फिर
आज तो रिश्ता खुद चलकर आया है, जात- पात को छोड़ो कितने ऊंचे खानदान का लड़का है, पढ़ा- लिखा है आपकी लड़की के सपनों को, आपकी लड़की को समझता है और क्या चाहिए?
उस वक्त अनमने मन से सही ममता के घरवाले मान गए। दीपक और ममता की शादी साधारण तरीके से हो गई मगर आज जब ममता और दीपक दोनों सफल हैं और वह दीपक के साथ बहुत खुश हैं तो ममता के घर वाले कहते हैं कि हम कितना भी अच्छा ढूंढते तो शायद ऐसा दूल्हा तुम्हारे लिए ना ढूंढ पाते।

इन दोनों के निस्वार्थ और सच्चे प्रेम ने सबका दिल जीत लिया और दोनों ने अपना रिश्ता सब के साथ ऐसे निभाया के दो अजनबी परिवारों को एक कर दिया।
और आज भी यह दोनों लोटस टेंपल घूमने जरूर जाते हैं, समय निकालकर। ममता और दीपक कहते हैं यह लोटस टेंपल हमारे प्रेम का प्रतीक है।






            वंदना शर्मा