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एक कविता  सजाई जाती है,

अंतर मन के भावों से---

कुछ अपने एहसासों से---

कागज पे उतारी जाती है,

शब्दों के मोतियों को जोड़कर ----

धागे में पिरोई जाती है,

एक कविता सजाई जाती है,

हाव भाव को देखो एहसास लिए हुए,

इर्द-गिर्द घूमते हैं विश्वास लिए हुए,

एक दिन पिरोए जायेंगे सुनहरी डोर में, 

बनेगी एक कविता रात्रि या भोर में,

भावों का सागर गहरा और घनघोर है, 

मस्तिष्क में आते हैं बड़े ही जोर शोर से,

भावों को सजाते हैं  शब्दों की डोर से,
 
 शब्दों के सहयोग से कविता रचाई जाती है।

   एक कविता सजाई जाती है


                  संगीता वर्मा✍✍