गिरते गए और गिर के उठते गए ।
सफर द़र सफर मजबूत होते गए।
कभी हंसते गए कभी रोतेे गए।
जिंदगी! सफ़र तेरा पूरा करते गए।
राह में आई कितनी भी कठिनाइयां ।
सहनेे को मिली कितनी रुसवाईयां।
हम सहते गए और सम्हलते गए।
जिंदगी ! सफ़र तेरा पूरा करते गए।
राहों में जाने कितने टेढ़े मोड़ मिले।
कितने ही हम जैसे खानाबदोश मिले।
कुछ मिलतेे गए कुछ छूटतेे भी गए।
जिंदगी ! सफ़र तेरा पूरा करते गए।
राह में आई कितनी तेज आंधियां।
चमकी कितनी सैकड़ों बिजलियाँ।
कर कानों को बंदअनसुना करते गए।
जिंदगी ! सफ़र तेरा पूरा करते गए।
राह में गमों की तेज बरसात भी हुई।
हिम्मत के छाते संग वो राह भी पार हुई।
हौसलों की बूंदे संग मेंं लिए संवरते गए।
जिंदगी! हम सफ़र तेरा पूरा करते गए।
कुछ अपने मिले ,कुछ बेगाने मिले।
कुछ ने सपने दिए कुछ ने तोड़े उसे।
अपनाया कुछ,विदा कुछ को कर दिए।
जिंदगी ! सफ़र तेरा पूरा करते गए।
किसी ने फूल दिए किसी ने कांटे दिए।
किसी नेकी बातें हंस के,तो चांटे भी दिए।
अच्छा लेते गए ,बुरा फेंक कर गए।
जिंदगी! सफ़र तेरा पूरा करते गए।
जिंदगी की राह कभी भी आसान नहीं होती ।
जिंदगी सभी के ऊपर मेहरबान नहीं होती ।
जिंदगी की इस फलसफे को समझते गए।
जिंदगी ! सफर तेरा पूरा करते गए।।
स्नेहलता पाण्डेय
नई दिल्ली

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