आसमान देखा है
जिसके आँचल में,
धरती जिसकी गोद में
जो कुछ था सब जाना
मेने माँ के उस गीत में
मुझे याद नहीं पर
सब कहते हैं
बहुत सताती थी मैं
खाना बनाती जब वो
तब बहुत रोती थी मैं
गोद में लेकर
आँचल की छाया में
दुलारती थी ,
रसोई बनाती चूल्हा जलाती
एक हाथ नहीं
सहस्त्र हाथो की मेरी जननी
मेरी माँ सब कर लेती
गणित कमजोर थी उसकी
आधी मांगने पर
पूरी रोटी देती
किसी डाक्टर सी मेरी माँ
जादूगरनी थी
सिर को सहलाती
दर्द गायब कर देती
सरसों के तेल से
अपने फटे दरारें दार
हाथो से मालिश करती
खुद का नहीं सबका
खयाल करती
हाँ मेरी माँ सब कुछ कर लेती
आसमान की तरह
बड़ा दिल
धरा सी धीर,गम्भीर
इन्द्रधनुषी रंग सी
अगाध ओर निश्छल
प्रेम की मूरत
मेरी माँ
खाने को घर पर कितना है
ना जाने कहां से ले आती
देकची खाली हो चाहे
बहुत सारा हे अभी
घरवालों को खिला देती
हाँ मेरी माँ
माँ बस माँ
कृष्णा की✍️ कलम से

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