सूर्य उपासना एवं उमंग
उत्साह पूरे मंगल पर्व
पूर्ण रहे सुख,शांति समृद्धि 
यह करे मकर सक्रांति|
आज सूर्य देवता के
आशीर्वाद रूपी वर्षा से
जीवन खुशियों से भर
अनन्त रश्मियों की
कर दी कान्ति
शुभ हो मकर सक्रांति|
तपस्या का योग
अग्नि सम जलाए,
चिंताएं हर ,दुख उसमें
स्वाहा हो जाए
संस्कारों को तिल के लड्डू
भांति ,एक दूझे में मिलाएं
पतंग की तरह,डोर थाम
अपना जीवन ऊंचा उठाएं|
किसी की डोर ,कभी ना कटे
खुश रहें, खुशियां बांटे
लोहडी,पोंगल व मकर सक्रांति
यों ही रहे सुख,अमन शांति|
गर्मी,वर्षा और सर्दी में
रही मौसम की भ्रांति,
सुख,चैन,मन सकून
सब ले आए मकर सक्रांति||



        वंदना  जोशी