मुस्कुराया चांद ! मेरी पहलू में।
चमचमाया चांद ! मेरी पहलू में।
सबने दुनिया में हर जगह ढूंढा,
सो रहा था चांद ! मेरी पहलू में।
तारों के बीच में नहीं, आकाश में नहीं, झिलमिलाया चांद ! मेरी पहलू में।
मैने आंखों से कुछ देखा ऐसे,
कसमसाया चांद ! मेरी पहलू में।
हमने सितम द़र सितम किए फिर भी,
सर छुपाया चांद !मेरी पहलू में।
हुस्ने इश्क है ,जोश है, तरन्नुम भी है।
पगलाया चांद ! मेरी पहलू में ।
अपनी आंखों से जो पिला दी मैनें।
लड़खड़ाया चांद ! मेरी पहलू में।
हंसी हंसी में ,एक बात ऐसी कह डाली,
शरमाया चांद !मेरी पहलू में।
स्वर्गीय प्रेम शंकर पाण्डेय
गोरखपुर

1 टिप्पणियाँ