भारत नहीं अब मौन रहेगा! 
      भारत नहीं तो कौन रहेगा! 
       सबको सच्ची राह दिखाता, 
       विश्व गुरु जो खुद कहलाता! 
     उसको कोई क्या सिखलाता? 
      यह सबका सरमौर रहेगा! 
       भारत नहीं तो कौन रहेगा! 
       भारत नहीं अब मौन रहेगा! 


       वेदों का है यहाँ अपना मान, 
       सब धर्म का यहाँ है सम्मान! 
       पत्थर में भी यहाँ हैं भगवान,
  अब, इतना गुण क्या गौण रहेगा
       भारत नहीं तो कौन रहेगा! 
      भारत नहीं अब मौन रहेगा! 


      याद करो सन् सत्तावन को, 
      हिला दिया था सिंहासन को! 
      जब जब भी विपदा आई, 
        अपने हिंदुस्तान पर! 
        एक एक ने सौ सौ मारा, 
       खेल गये अपनी जान पर! 
       अब इसका ही शौर्य रहेगा! 
        भारत नहीं तो कौन रहेगा, 
       भारत नहीं अब मौन रहेगा! 

    

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श्वेता कर्ण!