चाहे आए जितनी मुश्किलें
लौ जलाए रखो,
उम्मीदों का सूरज ढल भी जाए
आशा की लौ ना बुझने पाए;
इसी लौ के सहारे
मुसीबतों में भी
आगे बढ़ते जाएं,


अंधेरा हो चाहे घना जितना
रोशनी से भरा छोटा तिनका
भी मिटा देता है,
काली रातों का अंधेरा
बस तुम्हें यह लौ जलाए रखना;


आए लाख तूफान या फिर
चले हवाएं
बरसे बादल या छाएं काली 
घनी घटाएं,
इन सब से घबरा कर भी
तेरी यह हिम्मत ना टूटने पाए
बस आशा की लौ ना बुझने पाए:


जलाए रखना यह लौ अंत तक
इस लौ के सहारे ही
पार हो जाएंगी तेरी 
बाधाएं सारी,
इसके सहारे ही एक दिन
पार कर लोगे हर संकट,
पहुंचाएगी यह लौ ही
विजयपथ तक;





सिमरन