जय करुँ,जग जय करुँ
मन मोहक मन की आश
माँ सरस्वती मन की वास
जय करुँ,जग......
तुम ही शक्ति हो,
तुम ही भक्ति हो-2
कर्म भी तुम्हरे ही दास
माँ सरस्वती मन......
उज्वल भी तुम हो
प्रकाश भी तुम हो
माँ लहरों में तुम ही वास
माँ सरस्वती मन......
शब्दों वचन में वाश तुम हो
असहायों की आस तुम हो
मैं हूँ तेरी दया की पात्र
माँ सरस्वती मन......
विकास जगत में बसने वाली
कुबुद्धि सबका तु हरने वाली
वादन ही सूर की ताल
माँ सरस्वती मन......
माँ की ममता में तु समायीं
तारें आँखों में तु सजायीं
नव वन्दन करो स्वीकार
माँ सरस्वती मन....
विकास कुमार लाभ

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